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दुष्कर्मी जवानों ने लोगों के भरोसे को तोड़ा: कोर्ट

"देश के प्रथम नागरिक के सुरक्षा दस्ते में शामिल जवानों ने कर्तव्यों को भुला भ्रष्टमत से बेहद घिनौने कृत्य को अंजाम दिया। सेना के जवानों के कंधों पर न सिर्फ बॉर्डर की निगरानी की जिम्मेदारी होती है, बल्कि आमजन की सुरक्षा का जिम्मा भी जवानों पर होता है। ऐसे में सिहरन पैदा करने वाली वारदात को अंजाम देकर जवानों ने लोगों के भरोसे को तोड़ा है।" यह टिप्पणी पटियाला हाउस स्थित एडिशनल सेशन जज एस के सरवरिया की अदालत ने बुद्धा गार्डन सामूहिक दुष्कर्म के दोषी पाए गए हरप्रीत, सतेन्द्र एवं अन्य दो मुजरिमों की सजा पर फैसला सुनाते हुए की।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि  ‘मुजरिमों की दरिंदगीं तो देखों, पीड़िता के बॉयफ्रेंड के साथ सरेआम लूटपाट की और पार्क में ही सुनसान जगह पर लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। कर्तव्यनिष्ठ पद पर आसीन होने के बावजूद भक्षक की भूमिका निभाने वाले मुजरिम बेशक वे सेना के जवान ही क्यों न हों कठोर सजा के ही हकदार हैं। ताकि इन जवानों की यह सजा अन्य के लिए सबक बन सके। ’

हालांकि अदालत ने अन्य दो जवान मनीष एवं कुलदीप को लूटपाट और अपहरण का दोषी ही पाया है। लिहाजा उनकी सजा भी मुख्य आरोपियों से कम सुनाई गई है। वहीं, काली पगड़ी और सफेद कमीज पहने मुजरिम हरप्रीत और लाईनों वाली टी-शर्ट पहने सतेन्द्र ने जैसे ही सजा पर फैसला सुना, चेहरों पर मायूसी छा गई। जबकि कुलदीप और मनीष सजा सुनकर उदास नजर, लेकिन कहीं न कहीं उनके चेहरे पर कम सजा मिलने का संतोष भी नजर आ रहा था।

शनिवार दोपहर को अदालत में दोषियों की सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने उनके मुवक्किलों के प्रति सजा में नरमी बरते जाने की अपील की। वहीं अभियोजन पक्ष ने गंभीर अपराध का हवाला देते हुए मुजरिमों को कठोर सजा सुनाए जाने की गुजारिश अदालत से की। अदालत ने फैसला सुनाए जाने के लिए शाम 4 बजे का समय तय किया। तय समय पर अदालत कक्ष में मीडियाकर्मी, मुजरिमों के रिश्तेदारों एवं वकीलों का जमावड़ा लग गया।  शाम करीब 5 बजे जज ने मुजरिमों की सजा का ऐलान किया।

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