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शैडो: पुराने घिसे-पिटे फॉर्मूले पर फिल्म

शैडो: पुराने घिसे-पिटे फॉर्मूले पर फिल्म

सितारे: नसीर खान, मिलिंद सोमण, सोनाली कुलकर्णी, हर्षिता भट्ट, सचिन खेड़ेकर, सोनिया मेहरा, अहसान खान, मुश्ताक खान, विश्वजीत धान
निर्माता-बैनर: नसीर खान और शमशाद अलाम- ग्रेट एंटरटेनमेंट्स
निर्देशक: रोहित नायर
संगीत: आनंद राज आनंद

 

कहानी: शहर में कत्ल की वारदातों ने पुलिस की नाक में दम कर रखा है। अर्जुन शेरावत (नसीर खान) एक भाड़े का हत्यारा है, जिसकी पुलिस को तलाश है। पुलिस ऑफिसर संजना राजपूत (सोनाली कुलकर्णी) भी अर्जुन शेरावत की तलाश में है। खबरिया चैनल की रिपोर्टर शीतल धान (हर्षिता भट्ट) को भी अर्जुन के बारे में सनसनीखेज खबरों की तलाश रहती है। उधर राहुल कपूर (मिलिंद सोमण) भी एक रिपोर्टर है, जो शीतल के हर स्टेप्स की जानकारी रखता है। शहर में कत्ल का सिलसिला जारी रहता है। पुलिस को जब अर्जुन शेरावत के अगले निशाने के बारे में पहले से ही पता चलता है तो वह उसे मार डालती है। चारों ओर जश्न का माहौल बन जाता है। केस फाइलें बंद होने लगती हैं। लेकिन तभी अर्जुन शेरावत की एक वीडियो क्लिप पूरे शहर में हंगामा मचा देती है। वह अपने अगले टारगेट की घोषणा करता है। इस बार उसका निशाना हबीब फैजल (मुश्ताक खान) है, जिसका उसे अपहरण करना है।
 
निर्देशन: रोहित नायर के निर्देशन की थोड़ी तारीफ तो यहां जरूर करनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने सत्तर और अस्सी के दशक के घिसे-पिटे फॉर्मूले पर एक एक्शनपैक्ड फिल्म बनाने की कोशिश की है। तकनीकी रूप में उन्होंने इस मुद्दे पर काफी मेहनत भी की है। पर लेखन, स्क्रीनप्ले और संवादों की बानगी केवल फिल्म के हीरो-विलेन यानी नसीर खान के आसपास ही घूमने की वजह से रोहित को कुछ ज्यादा करने का मौका ही नहीं मिला।

अभिनय: नसीर खान को एक्टिंग करते देख यह कहना मुश्किल है कि उन्हें बिल्कुल दिखाई नहीं देता। वह कोई अभिनेता नहीं, इसलिए उनकी अभिनय क्षमता और अक्षमता की बात करना बेकार है। हां, वह कुछ दृश्यों में प्रभावी लगते भी है। पर फिल्म के अधिकांश हिस्सों में उन्होंने जिस बे-सिर पैर से स्टंट और कल्पनामयी स्टंट को अंजाम दिया है, वह एक चुनिंदा दर्शक वर्ग की तालियां पा सकते हैं। नसीर खान पूरी फिल्म पर हावी रहे हैं।

गीत-संगीत: चालू संगीत है, जो आगे की सीटों के दर्शकों को ही भाता है। 

क्या है खास: कुछ अच्छे स्टंट सीन्स हैं, जो लोगों को पसंद आएंगे।
 
क्या है बकवास: कुछ कर दिखाने की धुन में नासिर खान ने फिल्म में बहुत कुछ ऐसा ठूंस दिया है, जो आसानी से गले नहीं उतरता। उनकी हरकतें सुपरमैन सरीखी हैं, जो नाकाबिले बर्दाश्त हैं।
 
पंचलाइन: पुराने घिसे-पिटे फॉर्मूले की एक टारगेट आडियंस फिल्म, जिसके पास फालतू टाइम है, वही देखे।                                     

 

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