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भाजपा में बिना गोल के ही लगती है किक : जसवंत

भाजपा में बिना गोल के ही लगती है किक : जसवंत

पार्टी की बुनियादी विचाराधारा पर प्रहार करने के आरोप में बड़े बे-आबरू ढंग से भाजपा ने निकाले गए जसवंत सिंह का कहना है कि यह भगवा संगठन एक ऐसा खुला मैदान है, जहां हर दिन विचाराधारात्मक फुटबॉल पर किक लगाने की सबको आजादी है।

सिंह ने पार्टी के कोर ग्रुप को नौ जून को लिखे पत्र में लोकसभा चुनाव परिणामों की गहरी समीक्षा की मांग की है, जिसके चलते पार्टी नेतृत्व में अंतर्कलह मचा और अंततः लगभग ढ़ाई महीने बाद उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

भाजपा से बिना नोटिस निष्कासित किए गए जसवंत ने इस पत्र में कहा है,  पार्टी एक खुला मैदान बन गई है, जहां हर दिन विचाराधारात्मक फुटबॉल मिलती है। हर किसी को उस पर कहीं भी किक लगाने की छूट है क्योंकि गोल तो है नहीं।

इस पत्र को लिखे जाने के बाद से ही उनके और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में तकरार शुरू हो गई। सिंह ने इसी पत्र में इस साल हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन और उसके बाद कुछ लोगों को मिले ईनाम के बीच संबंध के बारे में भी पूछा।

उन्होंने कहा कि चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए जब पार्टी का शीर्ष नेतृत्व (आडवाणी) जवाबदेही स्वीकार कर सकता है तो हम या वे लोग क्यों नहीं जो पार्टी को चला रहे हैं। क्या नतीजों और ईनाम के बीच कोई रिश्ता नहीं है  या हम सफलता का श्रेय तो लेते हैं, लेकिन असफलता का दोष किसी और पर मढ़ देते है।

इस पत्र के जरिए सिंह ने लोकसभा चुनाव के पार्टी के मुख्य रणनीतिकार रहे जेटली को परोक्ष निशाना बनाते हुए प्रदर्शन और ईनाम के बीच रिश्ते का सवाल उठा कर उन्हें राज्यसभा में विपक्ष का नेता बनाने के शीर्ष नेतृत्व के फैसले को एक तरह से चुनौती दी है।

सिंह ने 2004 के लोकसभा चुनाव और राजस्थान के विधानसभा चुनाव के विश्लेषण को सार्वजनिक नहीं किए जाने की भी आलोचना करते हुए पत्र में कहा कि हम आज भी उस खराब प्रदर्शन पर हुई चर्चा के नतीजों से वाकिफ नहीं हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि इस साल हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के विश्लेषण का भी कहीं यही हश्र नहीं हो।

पार्टी में व्याप्त अंतर्कलह के बारे में उन्होंने कहा कि सामूहिक आवाज तभी पैदा हो सकती है जब आपसी सम्मान और सहयोग हो, जो नहीं है। नतीजतन गड़बड़ी बढ़ेगी। यह अवश्यसंभावी है। अपने इस पत्र में सिंह ने पार्टी के कोर ग्रुप से आग्रह किया था कि एक समय सीमा के भीतर चुनाव परिणामों की गहरी समीक्षा की जाए । उन्होंने यह भी आगाह किया कि इसमें किसी भी तरह का विलंब भारी नुकसानदायक होगा।

उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों की ईमानदार समीक्षा से जवाबदेही का सिद्धांत स्थापित होगा। यह दिखना चाहिए कि निर्णायक कार्रवाई की जा रही है।

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