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20 जनवरी, 2020|11:54|IST

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दो टूक (22 अगस्त, 2009)

दजर्नों खबरों के बीच आज आप उस शख्स की खबर भी पढ़ेंगे जो अपने नशे का खर्च निकालने के लिए 84 बार खून दे चुका है। साथ में उस किडनी दलाल का ब्यौरा भी है जो 25 लोगों को गुर्दे दिलवा चुका है। इन खबरों को जरा गौर से पढ़िए।

ये गरीबी, लालच और अपराध की मिली-जुली दास्तान हैं। वे हमें मेडिकल अंडरवर्ल्ड की झंकी दिखाती हैं। वह दुनिया जिसमें गरीब लोग महज अंगों के खेत हैं। जिसमें अमीर जब चाहें फसल काट कर ले जा सकते हैं। जिसमें खून का सौदा होता है। लेकिन एक नोबल प्रोफेशन के ऐसे पतन के लिए सिर्फ लालची डॉक्टर जिम्मेवार नहीं। मर्ज से मजबूर मरीज भी नहीं। सबसे बड़ा गुनाहगार वह सिस्टम है जो अंग बेचने या खरीदने की ऐसी शर्मनाक परिस्थितियों की गुंजाइश रखता है।

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  • Web Title:दो टूक (22 अगस्त, 2009)