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लटका पड़ा है खिरोई तटबंध मरम्मत का प्रस्ताव

खिरोई नदी के तटबंध को दुरुस्त करने का प्रस्ताव गत तीन वर्षों से फाइलों की खाक छान रहा है। तटबंध की मरम्मत और उन्हें सुदृढ़ करने का डीपीआर तैयार कर गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (जीएफसीसी) को वर्ष 2006  में ही भेजा गया है लेकिन वहां से अब तक स्वीकृति की मुहर नहीं लगी है। हाल यह है कि यह नदी पिछले तीन वर्षो से उत्तर बिहार के बड़े हिस्से में कहर बरपा रही है।  इस वर्ष तो नदी ने बड़े हिस्से में परेशानी खड़ी कर दी है।

खिरोई अधवारा समूह की नदी है और नेपाल से बिहार में सीतामढ़ी में प्रवेश करती है। खिरोई नदी का तटबंध लगभग दो दशकों से दोनो ओर क्षतिग्रस्त है। नीतीश सरकार बनने के बाद वर्ष 2006 में जीएफसीसी को तटबंध की मरम्मत से लेकर इसे ऊंचा करने और सुदृढ़ीकरण हेतु डीपीआर सौंपा गया। इसका क्लीयरेंस अब तक नहीं मिला है।

खिरोई नदी नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में बारिश होने पर भर जाती है।  बारिश होते ही नदी खतरनाक स्तर को पार कर जाती है। कई जगहों पर नदी का पानी तटबंध को पार कर जाता है। इस वर्ष नेपाल में बारिश की वजह से 20 अगस्त को नदी का जलस्नाव काफी बढ़ गया और बांया तटबंध 10 वें किलोमीटर पर और दायां तटबंध 14-15 किलोमीटर पर क्षतिग्रस्त हो गया।

विभाग टूटे तटबंध को दुरुस्त करने में जुटा है। हालांकि विभाग के अधिकारी का कहना है कि जब तक जीएफसीसी इसके डीपीआर को मंजूर नहीं करता तब तक परेशानी होती रहेगी।

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