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नया टैक्स कोड और आपः कुछ मीठा है, कुछ खट्टा

पिछले 40 साल से मैं टैक्स की दुनिया में कार्यरत हूं और मैंने पहली बार देखा है कि कानूनों की जटिलताओं की शिकार होती जनता के लिए एक ऐसा कानून बनाया जा रहा है, जो बहुत सरल होगा। नए टैक्स कोड को पहली बार देखने पर 90 फीसदी मसौदा समझ में आ जाएगा। समझने में आसान इस टैक्स कोड के विकसित होने से स्थिति बेहतर होगी। इसके सभी प्रावधान सरल हैं। कुछ वर्ष पहले केलकर रिपोर्ट पेश की गई थी और अब यह डायरेक्ट टैक्स कोड कानून के रूप में आएगा। इसमें दोनों तरह के फ्लेवर हैं, यानी मीठे और खट्टे का मजा एक साथ। पहले मीठे पहलुओं पर नजर:

1. रोज-रोज की उठा-पटक से मुक्ति
जैसा कोड बना है उससे कम से कम यह मंशा तो दिख रही है कि इसमें बार-बार बदलाव नहीं होगा। यानी फाइनेंस बिल पेश करने की जरूरत नहीं होगी। इस कोड में इनकम टैक्स की दरें भी लिख दी गई हैं। बजट में इस बाबत ज्यादा उठा-पटक की जरूरत नहीं होगी। हर साल परिवर्तन की संभावना कम होगी। टैक्सपेयर निश्चिंत होकर अपनी टैक्स प्लैनिंग कर सकेंगे।

2. टैक्स दरें संतुलित
नए टैक्स कोड में रीजनेबल टैक्स रेट का प्रारूप रखा गया है। 10 लाख तक 10 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान आकर्षक है। वर्तमान में 10 लाख पर 30 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है। यह काफी उचित दर है, मेरा मानना है कि इससे टैक्स चोरी कम होगी और सरकार के पास टैक्स का क्लेक्शन बढ़ेगा।

3. एक्सट्रा डेप्रिसिएशन
कई वर्ष के बाद डायरेक्ट टैक्स में उद्योग जगत को राहत मिलने जा रही है। इस नए प्रावधान के तहत नए प्लांट या मशीनरी लगाने वालों को घिसाई भत्ते (डेप्रिसिएशन एलाउंस) के अलावा 20 प्रतिशत अतिरिक्त इनिशियल डेप्रिसिएशन प्लांट और मशीनरी के लिए मिलेगा। इससे उद्योगों को नई तकनीक को फायदा भी मिलेगा।

4. डोनेशन के तीन विकल्प
नए टैक्स कोड में दान देने वालों को तीन विकल्प दिए जाएंगे। करदाताओं को 125 प्रतिशत, 100 प्रतिशत और 50 प्रतिशत की तीन छूट मिलेंगी। यह टैक्सपेयर के लिए काफी राहत वाली बात है। नॉन प्रॉफिट आर्गेनाइजेशंस, चैरिटी ट्रस्ट के लिए निवेश के नियमों में बदलाव से ऐसी संस्थाओं की आमदनी बढेंगी।

5.छोटे व्यापारियों को फायदा
नए टैक्स कोड के मुताबिक छोटे व्यापारी चाहे वह फुटकर हो या लघु उद्योग, को एक करोड़ की बिक्री पर बिना बही-खाता रखे इनकम टैक्स देने की छूट होगी। उसकी कुल बिक्री मे मात्र 8 प्रतिशत को ही उसकी आय माना जाएगा और उस पर स्लैब रेट से आयकर लगेगा और उसी तरह से छूट की सीमा और 10 फीसदी टैक्स लागू होगा। ऐसे में उसे खातों को रखने से पूरी तरह से मुक्ति मिलेगी।

6. खर्चो का विवरण
पहली बार व्यापार और व्यवसाय करने वालों द्वारा किए जाने वाले उन खर्चो का विस्तृत विवरण दिया गया है जो इनकम टैक्स की गणना करते हुए आयकर के दायरे में आते हैं। इनसे करदाताओं को व्यापारिक आय गणना में मदद मिलेगी।

7. वैल्थ टैक्स 50 करोड़ पर ही
वर्तमान में वर्ष में 30 लाख तक की संपत्ति पर टैक्स नहीं देना पड़ता था, किंतु नए टैक्स कोड में यह छूट सीमा 50 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। सुनते ही लगता है कि मानो छपाई में कोई गलती हो गई है, लेकिन यही सही है। हालांकि अब इसमें सभी तरह की संपत्ति शामिल हो जाएगी यानी सभी एसेट क्लास जैसे शेयर, म्यूचुअल फंड आदि।

8. इंडेक्स बदला
कैपिटल गेन लेने वाले लोगों को इस नए टैक्स कोड में फायदा होने जा रहा है। इसमें कॉस्ट इंफ्लेशन इंडैक्स का मूल्यांकन वर्ष 2000 से किया जाएगा न कि वर्तमान में लागू 1981 के हिसाब से।

9. टैक्स की न्याय संगत दरें
इनकम टैक्स की दरें काफी न्याय संगत हैं। विशेष तौर से प्रथम 10 लाख की आय पर केवल 10 प्रतिशत इनकम टैक्स काफी लुभावना दिखता है। साथ ही साथ सरचार्ज और एजुकेशन सेस का कोई झंझट भी नहीं। एक तो टैक्स रेट कम ऊपर से सरचार्ज और सेस से मुक्ति मिलने से टैक्सपेयर को राहत मिलेगी।

10. टैक्स-फ्री बांड
टैक्स कोड की धारा-74 में जिक्र है टैक्स-फ्री ब्याज का। इससे प्रतीत होता है कि सरकार कुछ विशेष टैक्स-फ्री बांड निकालेगी जिनका लाभ टैक्सपेयर ले सकते हैं।

11. कैपिटल गेन बचाने की अवधि बढ़ी
वर्तमान में यह नियम लागू है कि पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) पर टैक्स बचाने के लिए तीन साल के अंदर रिहायशी मकान में निवेश किया जाता है। नए कोड में समय सीमा को बढ़ाया गया है। इसके मुताबिक जिस वित्तीय वर्ष में कैपिटल गेन हुआ है उसको छोड़कर अगले तीन साल में निवेश किया जा सकेगा।

12. सोशल सिक्योरिटी पर जोर
सरकार ने कहीं पर भी सोशल सिक्योरिटी स्कीम की बात नहीं की है किन्तु ईईटी यानी एग्जेम्प्ट, टैक्स की प्रक्रिया को क्रियान्वित करने की वजह से करदाताओं को उनके स्वयं के प्रयास से सोशल सिक्योरिटी का काम हो जाएगा। विशेष तौर से इसकी वजह कोड में किया गया प्रस्ताव है कि निश्चित तरह के निवेश करने पर टैक्स में छूट मिलेगी परंतु जब पैसा निकाला जाएगा तो उस पर टैक्स लगेगा। ऐसा कानून होने की वजह से टैक्सपेयर पैसा नहीं निकालेंगे तो टैक्स नहीं लगेगा और बेशक मजबूरी में ही सही बुढ़ापे के लिए पीएफ, इंश्योरेंस, पेंशन प्लान इत्यादि में स्वयं के लिए पैसे निवेशित रहेंगे।

खट्टे अनुभव

टैक्स कोड में कुछ चुभने वाले पहलू भी शामिल हैं जिन्हें अगर सरकार दूर कर दे तो यह टैक्स कोड अविस्मरणीय हो जाएगा और टैक्स का कंप्लायंस भी बढ़ेगा। 10 दिन पहले जब टैक्स कोड आया था तो लोगों से बातचीत के बाद जो बातें सामने आई हैं उन पर वित्त मंत्रालय गौर करना चाहिए:

1. छीने निवेश के विकल्प
टैक्स में कटौती के लिए मिलने वाले निवेश के विकल्पों को हम कई सालों से जानते और समझते आए हैं लेकिन नए टैक्स कोड में उनको इस सूची से हटा दिया गया है। इनमें प्रमुख हैं पोस्ट ऑफिस में निवेश, पीपीएफ, ईएलएसएस, पांच वर्षीय बैंक एफडीआर। इन निवेशों से आम निवेशक परिचित हैं इन्हें जारी रखना जरूरी भी है।

2. ईईटी देगा दुख
ईईटी की अवधारणा आने वाली है। सरकार की मंशा इस नए टैक्स कोड में साफ देखी जा सकती है। सरकार से गुजारिश है कि 2011 तक जो निवेश हो चुका है उस पर एग्जेम्प्ट-एग्जेम्प्ट-टैक्स की मार नहीं पड़नी चाहिए। नए टैक्स कोड लोगू होने से पहले किए गए लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी जैसे लंबी अवधि के निवेश को मेच्योरिटी पर टैक्स से मुक्त रखा जाना चाहिए। सरकार इस दिशा में सही कदम उठाते हुए कोड में परिवर्तन करे।

3. होम लोन की छूट की वापसी करेगी परेशान
भारत में लाखों करदाता ऐसे हैं जो इनकम टैक्स कानून में रिहाइशी मकान की छूट उठाने के लिए लोन लेकर अपने मकान बनवाते हैं। होम लोन लेने वाले करदाताओं को वर्तमान में 1.5 लाख रुपये तक ब्याज राशि और धारा-80 सी के तहत एक लाख रुपये मूलधन की वापसी पर छूट मिलती है। नए कोड में दोनों तरह की रियायतों का प्रावधान नहीं है। इसका मतलब होगा कि उनकों नए टैक्स कोड में काफी ज्यादा आयकर देना होगा।

4. कंपनी से ज्यादा टैक्स व्यक्तिगत करदाता का
वर्तमान में व्यक्तिगत और अविभाजित हिन्दू परिवार यानी एचयूएफ के लिए टैक्स की दरें समान हैं, लेकिन नए टैक्स कोड में कंपनियों के लिए इनकम टैक्स की दर 25 प्रतिशत करने का प्रावधान है। एक तरफ जब व्यक्तिगत टैक्स की दर 30 प्रतिशत है तो कंपनी की टैक्स दर 25 फीसदी क्यों?

पिछले 40-50 वर्ष में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि कंपनी टैक्स की दर ज्यादा हो, व्यक्तिगत टैक्स की दर। सरकार को चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा सीमा 25 प्रतिशत हो। भारत के टैक्स पेयर जबरदस्त प्रस्न्नता जाहिर करेंगे यदि सरकार व्यक्तिगत टैक्सपेयर की दर 10 लाख तक 10 प्रतिशत, 10 लाख से 25 लाख तक 15 प्रतिशत और 26 लाख से ऊपर 25 प्रतिशत कर दे। वैसे भी जो 30 प्रतिशत टैक्स लगाने का प्रस्ताव है वह व्यक्तिगत टैक्स पेयर को भारी लगेगा विशेष रूप से वेतनभोगी को, क्योंकि उस पर वेतन के अलावा अन्य भत्तों पर भी टैक्स लगेगा।

5. सरकारी कर्मचारियों को परेशानी
नए टैक्स कोड से सरकारी कर्मचारियों को तो इस कोड से काफी परेशानी होने वाली है क्योंकि डिसक्शन पेपर में क्लीयर किया गया है कि उन्हें सरकारी मकान के किराये की गणना प्राइवेट सेक्टर के समान ही की जाएगी।

6. नॉन प्राफिट आर्गेनाइजेशन पर लगेगा टैक्स
लाखों सेवा संस्थाओं और शैक्षिक संस्थाओं पर सरकार ने नए टैक्स कोड में 15 फीसदी इनकम टैक्स लगाने का प्रावधान रखा है। अत: ऐसी संस्थाओं को काफी दिक्कत होगी। इनकम टैक्स तो लगेगा और उस पर कोई एग्जेम्पशन लिमिट भी नहीं होगी।

7. बिल का झंझट और बढ़ा
इसमें व्यापारिक व्यक्ति के लिए प्रावधान है कि उसे हर बिल पर नाम, पता व अन्य विवरण लिखने होंगे। उन जगहों पर परेशानी कई गुना बढ़ जाएगी जहां रोजना हजारों बिल काटे जाते हैं। टैक्स ऑडिट की सीमा को भी नहीं बढ़ाया गया है। वर्तमान में टैक्स ऑडिट की सीमा 40 लाख रुपये है। मुद्रास्फीति को देखते हुए इसे एक करोड़ किया जाना चाहिए था। पिछले कुछ महीनों में देश भर में विभिन्न मंचों पर हुई चर्चाओं के दौरान यह उभर कर सामने आया है कि ऑडिट सीमा बढ़ने से सरकार को टैक्स क्लेक्शन ज्यादा मिलेगा।

8. लंबे समय तक रखने होंगे रिकार्ड
पुन: कर निर्धारण की समय सीमा भी नए टैक्स कोड में बढ़ाकर 7 वर्ष कर दी गई है जिससे करदाता को लंबे समय तक रिकार्ड रखने होंगे। अभी तक यह समय सीमा 6 वर्ष है। सरकार को चाहिए कि इस ऑनलाइन युग में इस समय सीमा को घटाकर सिर्फ 3 वर्ष कर दिया जाए।

9. क्लबिंग से मुक्ति नहीं
आम आदमी को सताने वाला क्लबिंग ऑफ इनकम ऑफ स्पाउस नए टैक्स कोड में भी कायम है। अगर कोई आदमी अपनी पत्नी को कोई गिफ्ट देता है तो उससे होने वाली आय उम्रभर पति की टैक्स देनदारी बढ़ाती रहेगी। होना तो यह चाहिए कि पत्नी को एक अलग इकाई मानकर असेसमेंट हो या फिर इस बारे में किसी तरह की कोई समय सीमा होती। सीमा या प्रतिशत रखने से पति को किसी तरह की रियायत तो मिलती। इसमें बदलाव होना चाहिए।

10. पेनल्टी बढ़ाने का प्रस्ताव
अगर आपने रिटर्न भरा और आईटी ऑफिसर ने क्लेम नहीं माना तो पेनल्टी राशि टैक्स की 200 फीसदी तक हो सकती है। कानून ऐसा आसान होना चाहिए जिसमें टैक्स चोरी की बात ही न हो। न पेनल्टी की और न जेल की गुंजाइश हो।

11. एसटीटी की छुट्टी से नुकसान
नए टैक्स कोड में एसटीटी लुप्त होगा। उसे पहली नजर में सब अच्छा मानेंगे लेकिन एक साल बाद क्या होगा? वर्तमान में कानून है कि जिन शेयरों पर एसटीटी लगा है उस पर एक साल बाद लांग टर्म कैपीटल गेन नहीं लगता परंतु नए कोड में धाराएं हैं जिनमें यह एग्जेम्पशन गायब हो जाएगा। नए कोड में कैपीटल गेन बांड के बदले कैपीटल गेन सेविंग स्कीम में निवेश करने से टैक्स बचेगा। दुख की बात यह है कि इस स्कीम से पैसा निकालने पर टैक्स लग जाएगा।

12. रिटायरमेंट पर भी लगेगा जोर का झटका
रिटायर वेतनभोगी को मिलने वाली ग्रेच्यूटी और वीआरएस वर्तमान में क्रमश: 3 लाख और 5 लाख तक टैक्स फ्री हैं। लेकिन नए कोड में ये तभी टैक्स फ्री होंगे जब इस राशि को रिटायरमेंट बेनेफिट एकाउंट में निवेश किया जाएगा। लेकिन जब भी इसमें से पैसा निकालेंगे इस पर टैक्स का कोड़ा पड़ेगा।

13. हाउस प्रापर्टी की आय पर ज्यादा टैक्स
नए कोड के मुताबिक हाउस प्रापर्टी की आय पर ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा क्योंकि वर्तमान समय में मकान के किराये की आय में 30 प्रतिशत की छूट मिलती है। वह छूट 20 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इस नए कोड में एक भी ऐसा प्रस्ताव नहीं जिसमें आवासीय मकानों में निवेश का प्रोत्साहन मिले।

14. पुराने ढ़र्रे की परेशानियां
कुछ राशियां भी नए टैक्स कोड में कायम हैं जैसे व्यापार खर्च के लिए नगद भुगतान राशि 20 हजार ही रखी गई है। इसी प्रकार नगद लोन देने-लेने की राशि भी वर्तमान के 20 हजार पर ही रखी गई है। जिसके पास अपना मकान नहीं है वह किराए के मकान में रहता है तो उसे महीने में 2000 रुपये की छूट मिलती है। नए कोड में इस सीमा को इस राशि पर स्थिर रखा गया है। इन सब बातों से करदाता के मन में क्षोभ है। करदाता समझ नहीं पाते कि अगर वह सरकार को टैक्स देने में देर करता है तो सरकार उस पर 12 फीसदी का जुर्माना लगाती है और ज्यादा टैक्स काटने पर उसका रिफंड मिलने में देरी होने पर सिर्फ 6 फीसदी सालाना ही क्यों दिया जाता है। ऐसा फर्क क्यों? सभी पाठकों से अनुरोध है कि डायरेक्ट टैक्स कोड के प्रावधानों पर उनके पास सुझाव हो तो वे वित्त मंत्री के कार्यालय में उन्हें भेजें। उनका ईमेल आईडी है-

directtaxescode-rev@nic.in

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