DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पोर्टफोलियो मैनेजमेंट

पोर्टफोलियो किसी व्यक्ति की चल एवं अचल संपत्तियों का मिश्रण होता है जिसमें बैंक डिपॉजिट, शेयर, डिबेंचर एवं बांड के साथ गैर वित्तीय परिसंपत्तियां जैसे भूमि एवं आवास रूपी जयदाद का भी समावेश होता है। मोटे तौर पर कहा जाए तो पोर्टफोलियो मैनेजमेंट व्यक्ति के उद्देश्य के अनुरूप संपत्तियों का मिश्रण तैयार करता है।

पोर्टफोलियो क्यों: रिस्क और ज्यादा लाभ के लिहाज से प्रत्येक परिसंपत्ति के अपने फायदे, नुकसान होते हैं। जिस संपत्ति में रिस्क ज्यादा होता है, उसमें लाभ मिलने की संभावना भी ज्यादा होती है, ज्यादातर ऐसी संपत्तियां शॉर्ट टर्म होती हैं। कुछ ऐसी होती हैं, जिनमें पैसा डूबने की संभावना तो कम होती है, लेकिन उनमें निवेश लंबे समय के लिए होता है। इसकी वजह से लोग ऐसा पोर्टफोलियो बनाते हैं, जो जोखिम और सुरक्षा प्रदान करने वाली संपत्तियों का मिश्रण हो। चूंकि शेयर बाजार में अस्थिरता होती है, जिसकी वजह से किए गए निवेश के बारे में अनिश्चितता का माहौल बना रहता है। ऐसे में मुख्यत: पोर्टफोलियो की जरूरत इसलिए पड़ती है कि व्यक्ति रिस्क भी ले सके और उसकी पूंजी की भी सुरक्षा रहे। इससे उसे अपने निवेश, रिस्क क्षमता, प्रतिफल और स्थिति के आधार पर शेयरों को बांटने का मौका मिल जाता है।

निश्चित प्रारूप नहीं : पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का कोई एक निश्चित प्रारूप नहीं होता। कुछ लोग अपने पोर्टफोलियो में जहां रिस्क लेने वाली परिसंपत्तियों का अनुपात ज्यादा रखते हैं, तो कुछ पोर्टफोलियो में सुरक्षा प्रदान करने वाली परिसंपत्तियों का। मोटे तौर पर कहें तो यह मुख्यत: तरलता, जोखिम और सिक्योरिटी पर निर्भर करता है।

(पाठकों की मांग पर)

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:पोर्टफोलियो मैनेजमेंट