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दृढ़ या आक्रामक

करियर में कामयाब होने के लिए आपके पास इतना साहस जरूर होना चाहिए कि अपनी सही बात और पक्ष को दृढ़ता के साथ रख सकें। क्योंकि टिकाऊ कामयाबी मांगने से नहीं, आक्रामक हुए बगैर अपने तार्किक सुझाव और अपेक्षाओं को प्रस्तुत करने से मिलती है। करियर ही नहीं, आम जिंदगी में भी मजबूत तरीके से अपनी बात कहने की शक्ति ही अंतर-वयक्तिक संबंध का आधार बनती है। लेकिन जब यह शक्ति दूसरों पर जबरन हावी होने का जरिया बन जाए, तो आक्रामकता कहलाती है, जो अंतत: नुकसान पहुंचाती है।

अपनी आकांक्षाओं का स्पष्ट खाका दिमाग में बनाकर रखें, और हालात काबू से बाहर न जाने दें। ये न समझें कि आपकी उम्मीदों और अपेक्षाओं को कोई खुद ही समझ जाएगा और पूरा कर देगा। आपको कहना ही पड़ेगा।

ध्यान रखें, आपकी भाव भंगिमा यानी बॉडी लैंग्वेज देखकर उसके हिसाब से ही लोग आपसे व्यवहार करते हैं। इसलिए हमेशा आत्मविश्वास से पेश आइए। डरकर रहेंगे, तो लोग दबाएंगे ही।

आपके बोलने की टोन, पिच और उतार-चढ़ाव भी मायने रखते हैं। स्पष्टता के साथ जोर से और दमदार तरीके से अपनी बात कहें, लेकिन इसका मतलब चिल्लाना नहीं है।

हमेशा सतर्क और तैयार रहिए। तभी अधिकारपूर्वक अपनी बात कह पाएंगे, जो दूर तक असर भी करेगी। दोस्ताना अंदाज में मुस्कुराकर बात करें।

भाषा पर गौर करें। आपके लफ्जों से सकारात्मकता झलकनी चाहिए। इसके अलावा सहयोग करने वालों का शुक्रिया अदा करने में कतई संकोच न करें।

यह भी जान लें कि दृढ़ता के जहां केवल फायदे ही फायदे हैं, वहीं आक्रामकता केवल विध्वंसकारी है। इससे आपके शत्रुओं की फौज तैयार हो जाती है, विश्वसनीयता नष्ट हो जाती है, और आपके लिए प्रतिशोध कर अग्निकुंड तैयार हो जाता है।

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