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उप चुनावों में बची सबकी इज्जत

उप चुनावों में बची सबकी इज्जत

आम चुनाव के बाद राजनीतिक दलों की पहली अग्नि परीक्षा में सभी ने अपनी अपनी इज्जत बचा ली जिसमें कांग्रेस और उसकी सहयोगियों ने पांच राज्यों की 17 विधानसभा सीटों में नौ पर कब्जा जमाया।

तमिलनाडु में कांग्रेस और इसकी सहयोगियों की जीत में मुख्य भूमिका विपक्षी अन्नाद्रमुक और उसके साथियों के चुनावबहिष्कार की रही जहां द्रमुक ने कम्मबम, बरगर और इलयानकुडी की तीन सीटें जीतीं। बाकी बचीं दो सीटें श्रीवाइकुंतम और थोंडामुथुर कांग्रेस की झोली में आईं।

उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ बसपा ने ताकत दिखाई। मुख्यमंत्री मायावती को मजबूत बनाने वाले परिणाम के तहत पार्टी ने मुरादाबाद, मलीहाबाद और बिधुना की तीन सीटें जीत लीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल ने मोरना की सीट पर कब्जा बरकरार रखा। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है जो न केवल कोई सीट जीतने में नाकामयाब रही बल्कि अपनी दो सीटें बसपा के हाथों गंवा दी।

लोकसभा चुनावों में जबर्दस्त प्रदर्शन से लबरेज रेल मंत्री ममता बनर्जी की तणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में बउबाजार और सियालदह़ दोनों सीटें जीत लीं जिन पर इससे पहले उसकी सहयोगी कांग्रेस का कब्जा था लेकिन इस बार उसने उम्मीदवार नहीं उतारे।

भाजपा शासित कर्नाटक में कांग्रेस का निराशाजन प्रदर्शन जारी रहा जहां पांच विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव हुए थे। पार्टी अपने कब्जे वाली चार में सिर्फ गोविन्दराजनगर सीट बरकरार रखने में सफल रही लेकिन आवास मंत्री वी सोमन्ना की पराजय से उसे सांत्वना मिली होगी जिन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का दामन छोड़ दिया था। कांग्रेस को चितपुर में तगड़ा झटका लगा जहां केंद्रीय श्रम मंत्री एम मल्लिकाजरुन खरगे के पुत्र प्रियंक खरगे भाजपा के वाल्मिकी नायक के हाथों पराहित हो गए।

जद एस ने दो सीटों पर विजय दर्ज की। पार्टी रामनगर सीट पर कब्जा बनाए रखने पर सफल हुई और चेन्नपटना सीट उसनेकांग्रेस से छीन ली। भाजपा को भी दो स्थानों पर जीत मिली है। चितपुर के अलावा पार्टी कोलेगल में विजयी हुई है।

कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा का आंकड़ा अब 117 हो गया है और जदएस के पास 27 सीटे हैं जबकि कांग्रेस के विधायकों की संख्या घटकर 74 पर आ गई है।

पश्चिम बंगाल में शिखा मित्र और स्वर्ण कमल साहा (दोनों तणमूल) ने क्रमश: सियालदह और बउबाजार में जीत दर्ज की। तमिलनाडु में अभिनता से राजनेता बने विजय कांत की डीएमडीके की द्रविड पार्टियों द्रमुक और अन्नाद्रमुक के विकल्प केतौर पर उभरने के सपने को ठेस पहुंची और पार्टी कमबम सीट पर दूसरे स्थान पर रही।

आज की जीत से द्रमुक की स्थिति 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में बेहतर हुई है और उसका आंकड़ा 98 विधायकों का हो गया है जबकि बाहर से उसे समर्थन दे रहे कांग्रेस के पास अब 35 विधायक हैं।

द्रमुक अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एम करूणानिधि ने इस प्रदर्शन का श्रेय संप्रग सरकार और राज्य में उनकी सरकार के कामकाज को दिया है। उन्होंने कहा कि जनता ने अन्नाद्रमुक के बहिष्कार के आह्वान को खारिज कर दिया है। उन्होंने इस जीत का श्रेय अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के कठिन श्रम को भी दिया।

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