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25 फरवरी, 2020|5:41|IST

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गहन चेकिंग, पुलिस अलर्ट लेकिन लूट कैसे

पुलिस का दावा है कि गहन चेकिंग के दौरान पुलिस अलर्ट रहती है, लेकिन इसे अलर्ट कहेंगे या मौजमस्ती! शहर के भीड़ वाले चौराहे से एक व्यक्ति को हथियारों के बल पर बदमाशों ने अगवा किया और तीन घंटे से अधिक उसे सड़कों पर दौड़ाया।

इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें कहीं नहीं रोका-टोका। यही नहीं, पीड़ित जब मदद की गुहार लगाता रहा तो पुलिस ने उसकी आवाज को अनसुना किया। ऐसे में क्या शहर के लोग सुरक्षित हैं? यही नहीं, अक्सर यह भी पाया गया है कि रात में घटित घटना को पुलिस उतनी संजीदगी से नहीं लेती, जितना मामला संवदेनशील होता है।

ऐसा पहली बार नहीं, बल्कि नोएडा में ऐसी घटनाएं आम हो चुकी हैं। पुलिस के आंकड़े पर ही गौर करें तो जनवरी से अब तक 22 लोगों को इसी तरह बंधक बना लूटा गया, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। यही नहीं, इन घटनाओं में से एक को भी खोल पाने में पुलिस असमर्थ रही है। इस मामले में पीड़ित ने छूटने के बाद पुलिस को सूचना देनी चाही, लेकिन पुलिस ने उसकी नहीं सुनी। 

यही नहीं, मामला जब वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंचा तो पता चला कि शहर से वरिष्ठ अधिकारी गायब हैं। उल्लेखनीय है कि गत दो दिन पहले ही स्पाइस मॉल से नवविवाहिता अपहरण में डीएसपी शेलेन्द्र अपना क्षेत्र छोड़ दिल्ली निजी कार्य में थे, जिस पर एसएसपी ने उन्हें खरी खोटी भी सुनाई थी।

मामले में आईजी जावेद अख्तर ने कहा इस मामले में को गंभीरता से लिया गया है। अभी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई न करने का कारण केस को सुलझाना है। अगर पुलिस 72 घंटे में इसे सुलझा लेती है तो ठीक, नहीं तो कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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