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बदलते मौसम के साथ फ्लू का खतरा बढ़ा

तापमान में बदलाव के साथ वायरल फ्लू के वायरस भी एक्टीव होने लगे हैं। शारीरिक रुप से कमजोर व्यक्तियों पर इसका तेजी से असर पड़ता है। इसके चलते हर रोज बादशाह खान अस्पताल में सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित 65 से 70 मरीज इलाज कराने आ रहे है। निजी अस्पतालों में भी मरीजों के आने का सिलसिला जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी आमतौर पर पांच दिनों में ठीक हो जाती है। जबकि कमजोर व्यक्ति को ठीक होने में पखवाड़ा लग जाता है।

इनमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम होने के कारण इन्हें ठीक होने में एक सप्ताह से अधिक समय लग जाता है। मौसम में लगातार हो रही बदलाव और उमस भरी गर्मी के कारण सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक एक सप्ताह के दौरान ओपीडी कें मरीजों में 60 फीसदी वृद्धि हुई है। बीके अस्पताल के मेडिकल वार्ड में शुक्रवार को तेज बुखार से पीड़ित पांच लोगों को भर्ती कराया गया।

डॉ. अरविंद लोहान का कहना है कि इस मौसम में कमजोर वायरस भी एक्टीव हो जाते हैं। जो आमतौर पर शूगर, खून की कमी, टीवी और गर्भवती महीलाओं पर अटैक करते हैं। इन लोगों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता आम लोगों की तुलना में कम होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आम तौर पर फ्लू के मरीज पांच दिनों में ठीक हो जाते है। लेकिन जिनमें बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम होती है। उन्हें ठीक होने में पखवाड़ा लग जाता है।

सामान्य रोग विशेषज्ञ डॉ. अनील कुमार का कहना है कि शूगर के मरीज पर यह वायरस ज्यादा एक्टीव होता है। इसके रोगियों के रक्त में ग्लूकोज ज्यादा होता है। इसके कारण वायरस को पर्याप्त मात्रा में जीवित रहने की चीजें मिल जाती है।

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