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जसवंत प्रकरण कष्टदायक, पर जरूरी: आडवाणी

जसवंत प्रकरण कष्टदायक, पर जरूरी: आडवाणी

भाजपा के शीर्षस्थ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपने पूर्व सहयोगी जसवंत सिंह को पार्टी से निष्कासित के फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि उन्होने अपनी किताब में जो लिखा है, वह पार्टी के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। इसलिए उन्हे पार्टी से बाहर करने का फैसला करना पड़ा।

पिछले तीन दिनों से चल रही चिंतन बैठक के समापन पर आडवाणी ने अपने भाषण में कहा कि जो सहयोगी पिछले 30 वषरे से साथ रहा है, उसके खिलाफ कठोर फैसला करते समय मानसिक कष्ट होना स्वाभाविक ही है। उन्होने कहा कि लेकिन सिंह ने अपनी पुस्तक में जो लिखा है वह पार्टी के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है और इसलिए एक कठोर फैसला करना पड़ा है।

आडवाणी ने सिंह की किताब में सरदार बल्लभ भाई पटेल के बारे लिखे गए विचारों के संदर्भ में कहा कि पटेल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर जो पाबंदी लगाई थी वह तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहलाल नेहरु के दबाव में लगाई थी और आरएसएस पर पाबंदी लगाने के एक माह के तुरंत बाद पटेल ने पंडित नेहरु को लिखे पत्र में यह भी लिखा था कि महात्मा गांधी की हत्या में आरएसएस के शामिल होने का कोई प्रमाण उन्हे नहीं मिला है।

उन्होने कहा कि सरदार पटेल ने देश की 700 रियासतों का भारत के साथ विलय कराने का जो महत्वपूर्ण कार्य किया वह अभूतपूर्व था। आडवाणी ने सिंह की जिन्ना पर लिखी पुस्तक के संदर्भ में कहा कि जिन्ना को महिमामंडित करना तथा पटेल को अपमानित करना यह पार्टी के मूलभूत सिद्धातों के खिलाफ है। अत: सिंह के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई जरूरी थी।

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