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ड्रंकन ड्राइविंग जांच में स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी

पूरी दुनिया जहां स्वाइन फ्लू से सशंकित है वहीं साइबर सिटी पुलिस इससे अंजान है। ड्रंकन ड्राइविंग पर शिकंजा कसने के लिए हर दिन सैकड़ों वाहन चालकों की जांच, कभी भी जानलेवा साबित हो सकता है।

गुड़गांव ट्रैफिक पुलिस, दिल्ली और हरियाणा के दूसरे शहरों की ओर रूख करने वालों की चेकिंग करती है, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान स्वास्थ्य से जुड़े मानकों की सरेआम अनदेखी जारी है। इस बीमारी के कांटेजियस होने के बावजूद हर एक मिनट की अवधि के दौरान दो लोगों के मुंह में एल्कोमीटर प्रवेश कराकर, जांच की जाती है। विशेषज्ञों की मानें तो अगर, दो लोगों की जांच के दौरान इसकी सफाई नहीं की जाती है तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

ड्रंकन ड्राइविंग पर शिकंजा कसने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने विशेष अभियान की शुरुआत की थी। इसके लिए एल्कोमीटर से जांच की जाती है। लेकिन, जांच के दौरान पुलिस द्वारा बरती जा रही लापरवाही कभी भी इस बीमारी की सौगात दे सकती है। अगर, पुलिस की ऐसी बेफिक्री बनी रही तो वह दिन दूर शायद दूर नहीं जब साइबर सिटी में काम करने वाले लोगों को हर माह की तनख्वाह के साथ मु़फ्त में बीमारी भी मिलने लगेगी।

दिल्ली व एनसीआर के दूसरे शहरों से हर दिन लाखों की तादाद में नौकरी पेशा लोग अपने काम के सिलसिले में आते हैं। शराब पीकर वाहन चलाने वाले ड्राइवरों की जांच के लिए हर रात दोपहिया वाहन चालकों की विशेष अभियान के तहत जांच की जाती है। जांच के लिए एक्लोमीटर का कुछ हिस्सा उनके मुंह में प्रवेश कराने के बाद पुलिस कर्मी इसमें फूंक मारने को कहते हैँ।

 इस दौरान एक-दूसरे से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। देर शाम दिल्ली की लौटने के दौरान 250-300 लोगों की यह इक्विपमेंट जांच करता है। करीब हर 30 सेकेंड के अंतराल में दूसरे व्यक्ति को इसी प्रक्रिया से गुजरना होता है। ऐसे में सांस के जरिये संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। पूरी दुनिया जहां स्वाइन फ्लू के प्रसार के रफ्तार को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने में जुटी हैं, वहीं गुड़गांव पुलिस के कर्मी इस बात से शायद अब तक अंजान हैं।

इतना ही नहीं, अगर जांच प्रक्रिया से अंजान व्यक्ति थोड़ी भी देरी करता है तो उसके साथ सख्ती भी की जाती है। अलग-अलग कंपनियों में काम करने वाले पांच युवकों ने बातचीत में इसका खुलासा किया, हर दिन उन्हें ऐसी प्रक्रिया से गुजरना होता है। ऐसे में तमाम ऐहतियात बरतने के बावजूद स्वाइन फ्लू या अन्य बीमारी की चपेट में आने का खतरा बढ़ने लगा है।

आईटी कंपनी में काम करने वाले प्रशांत बताते हैं कि शराब पीने वालों की जांच करने के लिए यह तरीका इस दौर में शायद अनुकूल नहीं है। एक तरफ जहां स्वाइन फ्लू के डर से आम लोग सार्वजनिक स्थलों पर जाने से कतराने लगे हैं या मास्क पहन कर जा रहे हैँ। आर्टिमस के डॉक्टर अर्पित जैन के मुताबिक जांच प्रक्रिया के दौरान बरती जा रही थोड़ी भी लापरवाही स्वाइन फ्लू जैसी बीमारी के खतरें को कई गुना बढ़ा देती है।

उन्होंने बताया कि नाक और गले से स्त्रवित होने वाला कोई भी लिक्विड बीमारी के अंदेशे को बढ़ा देता है। इससे बचने के लिए जरुरी है कि हर व्यक्ति के लिए अगल माउथ पीस का इस्तेमाल करें या इसकी उचित सफाई के बाद ही इस्तेमाल करें।
डीसीपी ट्रैफिक सत्येन्द्र गुप्ता के मुताबिक अगर कोई मरीज स्वाइन फ्लू से पीड़ित हैं तो वह ड्राइविंग कर नहीं सकता है। लेकिन, सवाल यह उठता है कि कई ऐसे संदिग्ध हैं जिन्हें बीमारी के बारे में पता चलने में देरी की लगातार खबरें आ रही हैं।

पिछले सात महीनों के दौरान पुलिस ने ड्रंकन ड्राइविंग के करीब 4500 चालान किए हैँ। आंकड़े भी बताते हैँ कि इस पूरे अभियान के दौरान कितने लोगों की जांच की गई होगी।

 

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  • Web Title:पुलिस कर्मियों की लापरवाही से फ्लू का खतरा