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ब्लड बैंक पर भरोसा करना ठीक नहीं

किसी को जरूरत पड़ी तो शहर के ब्लड बैंकों में आसानी से खून मिलना बेहद मुश्किल होगा। निगेटिव बल्ड ग्रुपों का मिलना नामुमकिन है। बीके अस्पताल और रोटरी ब्लड बैंक के स्टॉक की हालत यही बयां करती है।

एनएच-एक संत भगत सिंह जी महाराज चैरीटेबल ट्रस्ट अस्पताल स्थित रोटरी ब्लड बैंक में 750 यूनिट खून स्टोर करने की क्षमता है। तीन रेफ्रिजरेटर खून को सुरक्षित रखने के लिए लगे हैं। बिजली की अलग व्यवस्था है। लेकिन रेफ्रिजरेटर में खाली पड़े हैं। इनमें रखने को खून नहीं है।

अस्पताल की मेडिकल ऑफिसर डॉ. गीता खुराना का कहना है कि बैंक में 120 यूनिट ब्लड है। इसमें ज्यादातर ए, बी, एबी और ओ पोजिटिव है। निगेटिव ब्लड ग्रुप की सात युनिट उपलब्ध हैं।

बीके अस्पताल के ब्लड बैंक की स्थिति और चिंताजनक है। यहां 350 यूनिट खून रखने के लिए पांच रेफ्रिजरेटर की व्यवस्था है। इन्हें चलाने के लिए अलग हॉटलाइन भी। पर खून उपलब्धता के नाम पर 64 यूनिट खून है। इसमें ए, बी, एबी और ओ पॉजिटिव खून बैंक में है। निगेटिव ब्लड ग्रुप की एक भी यूनिट नहीं है।

फोर्टिज एस्कॉर्ट्स, सवरेदय अस्पताल, सेंट्रल हॉस्पिटल और सनफ्लैग अस्पताल में भी खून की उपलब्ध की स्थित इन दोनों जैसी है। यह अस्पताल ब्लड डोनेशन कैंप में मिले खून का बड़ा हिस्सा बीके अस्पताल के ब्लड बैंक में जमा कराते हैं। वहां ब्लड नहीं है। इन निजी अस्पतालों के ब्लड बैंक में भी खून इतना नहीं है कि शहर में होने वाली घटनाओं, थैलेसीमिया और हीमोफिलिया के मरीजों की मांग को पूरा किया जा सके।

 

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