DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

तमिलनाडु : बहिष्कार के बावजूद मैदान में

जब तक यह लेख आप तक पहुंचेगा तमिलनाडु में 18 अगस्त को हुए उपचुनाव के लिए वोटों की गिनती का काम शुरू हो चुका होगा, और शाम तक नतीजे भी आ जाएंगे। हालांकि इस चुनाव में लोग ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं, क्योंकि मुख्य विपक्षी पार्टी अन्नाद्रमुक और उसकी सहयोगी पार्टियां पीएमके और एमडीएमके ने इस उपचुनाव का बहिष्कार किया है। उनका कहना है कि राज्य में द्रमुक की सरकार के रहते निष्पक्ष चुनाव मुमकिन नहीं है। इसके बावजूद पांचों निर्वाचन क्षेत्रों में चौतरफा संघर्ष हो रहा है। भाजपा, डीएमडीके और दोनों वामपंथी पार्टियां द्रमुक व कांग्रेस के उम्मीदवारों को चुनौती दे रही हैं। भाजपा और डीएमडीके सभी सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि दोनों वामपंथी पार्टियां संयुक्त रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि भाकपा और माकपा अभी कुछ ही समय पहले तक द्रमुक को समर्थन दे रहे थे, लेकिन अब वे अन्नाद्रमुक के साथ हैं। यह बात अलग है कि वे उसके बहिष्कार के फैसले का साथ नहीं दे रहे। द्रमुक बरगुर, इल्याकुंडी और कंबम का चुनाव लड़ रही है, जबकि कांग्रेस थोंडामुथुर और श्रीवाइकुंदम सीट पर मोर्चा संभाले हुए है।

अन्नाद्रमुक के मैदान से बाहर होने के कारण यह माना जा रहा था कि चुनाव एकतरफा ही रहेगा। लेकिन अब लग रहा है कि इस चुनाव में भी अन्नाद्रमुक और इसकी नेता जयाललिता ही अभी भी सत्ताधारी पार्टी की प्रमुख विरोधी बनी हुई हैं। द्रमुक के नेता एम. करुणानिधि ने चुनाव प्रचार के दौरान जयाललिता के लिए ‘श्रीमती’ शब्द का इस्तेमाल करके एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। करुणानिधि शायद इस बात से भड़के कि जयाललिता उनकी सरकार को हमेशा ही अल्पमत सरकार कहती रही हैं। शुरू में करुणानिधि ने इसे नजरंदाज किया और इसकी यह व्याख्या की कि अल्पसंख्यकों के प्रति हमदर्दी के कारण उनकी सरकार को अल्पसंख्यक सरकार कहा जा रहा है। लेकिन बाद में जब द्रमुक के कुछ सहयोगी दल अन्नाद्रमुक से मिल गए तो अल्पमत सरकार वाला व्यंग्य इतना बढ़ गया कि इसे नजरंदाज करना मुश्किल हो गया। द्रमुक सरकार को बाहर से समर्थन देने वाली कांग्रेस ने तो यहां तक सुझाव दे डाला कि उन्हें गठबंधन के सहयोगी की तरह पेश आना चाहिए। कांग्रेस के कुछ विधायकों ने यह टिप्पणी सदन में की जो यह बताती थी कि जयाललिता की टिप्पणियों का असर होने लगा है।

अपने विरोधियों पर इस तरह की टिप्पणियां द्रविड़ राजनैतिक संवाद शैली का हिस्सा रही हैं। इसका एक पक्ष होता है अपने विरोधी पर हल्ला बोलना और दूसरा अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को हंसने का मसाला देना। करुणानिधि ने जयाललिता के लिए ‘श्रीमती’ शब्द का इस्तेमाल जानबूझकर किया और साथ ही यह भी जोड़ दिया कि जब तक वे उनकी सरकार को अल्पमत कहती रहेंगी, वे भी जया के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करते रहेंगे। द्रमुक के सर्वेसर्वा जयाललिता की इस टिप्पणी से कितना चिढ़ गए हैं, इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में पार्टी की पत्रिका ‘मुरासोली’ ने जयललिता के खिलाफ अश्लील टिप्पणियां कीं। तमिलनाडु के राजनैतिक संवाद का स्तर तब और नीचे आ गया जब यह सवाल उछाला गया कि- क्या करुणानिधि सरकार जयललिता की वैवाहिक स्थिति को सरकारी आदेश से सुनिश्चित करेगी? वैसे जयललिता अगर द्रमुक सरकार को अल्पमत सरकार कहती हैं तो उनकी बात तकनीकी रूप से सही होती है, क्योंकि द्रमुक सरकार के पास बहुमत नहीं है और वह कांग्रेस के बाहर से समर्थन पर निर्भर है। इसके अलावा भी जयललिता करुणानिधि की एक से अधिक शादियों का जिक्र करती हैं और यह कहती हैं कि उनके कुनबे ने पूरे प्रशासन पर कब्जा कर रखा है। और करुणानिधि की ताज टिप्पणी पर भी वे चुप नहीं बैठी हैं। उन्होंने ‘श्रीमती’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर कहा कि यह मुख्यमंत्री द्वारा औरतों का अपमान है और चुनाव के दिन महिलाओं के लिए रैली का आयोजन भी कर डाला।

उपमुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन, उनकी बहन और राज्यसभा सदस्य कनीमोझी और उनके भाई केंद्रीय मंत्री अलागिरी ने उपचुनाव की रणनीति बनाते समय इस विवाद को पूरी तरह नजरंदाज किया और लगातार यह कोशिश की है कि पार्टी को भारी जीत मिले। उन्होंने द्रमुक के उन जिला सचिवों को पुरस्कार के रूप में सोने की चेन देने की घोषणा की जिनके क्षेत्र में पार्टी की जीत का अंतर सबसे ज्यादा होगा। द्रमुक के सहयोगी दल कांग्रेस ने भी ऐसी ही घोषणा अपने जिला सचिवों के लिए की है। वैसे द्रमुक के रणनीतिकारों का कहना है कि अन्नाद्रमुक ने चुनाव इसलिए नहीं लड़ा, क्योंकि उसका सांगठनिक ढांचा बड़ी बुरी स्थिति में है और वह हार का सामना नहीं करना चाहती। वैसे अफवाह यह भी है कि द्रमुक इसके बाद जल्द ही राज्य में मध्यावधि चुनाव करवा देना चाहती है, ताकि पार्टी को पूर्ण बहुमत मिल जाए।
 
radhaviswanath73@yahoo.com
लेखिका वरिष्ठ पत्रकार हैं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:तमिलनाडु : बहिष्कार के बावजूद मैदान में