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केन्द्रीय दल ने सूखे से नुकसान की बात स्वीकारी

केन्द्रीय जाँच दल ने स्वीकार किया है कि उत्तर प्रदेश में समय से बारिश न होने के कारण खरीफ की बुआई प्रभावित हुई है। साथ ही बोई गई फसल की उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। केन्द्रीय दल ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि पेयजल तथा सिंचाई योजनाओं के बेहतर संचालन पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

दल ने कहा है कि हैण्डपम्पों को चालू हालत में रखा जाए तथा सुचारु विद्युत आपूर्ति के लिए खराब ट्रांसफार्मरों को  यथाशीघ्र बदलने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अपर सचिव संजीव गुप्ता के नेतृत्व में आए 11 सदस्यीय दल के सदस्यों ने तीन ग्रुपों में बंटकर 17 से 20 अगस्त तक प्रदेश के 28 जनपदों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान जो कुछ देखा, उसके बारे में मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता व अन्य सम्बंधित अधिकारियों को गुरुवार को जानकारी दी।

केन्द्रीय दल ने बीजों के मिनी किट वितरण, विद्युत आपूर्ति, स्प्रिंकलर सेटों के वितरण, सामुदायिक रसोई, पशु शिविर आदि के संचालन के बारे में आवश्यक सुझाव दिए। केन्द्रीय दल के साथ हुई बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को पशुओं के चारे की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए।

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त वी.के. शर्मा, प्रमुख सचिव कृषि रोहित नन्दन, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास श्रीकृष्ण, प्रमुख सचिव राजस्व गोविन्दन नायर, प्रमुख सचिव सिंचाई अरुण सिन्हा तथा राहत आयुक्त एस.एन. शुक्ला आदि अधिकारी मौजूद थे। इसके बाद केंद्रीय टीम दिल्ली वापस लौट गई। केंद्रीय टीम प्रदेश में सूखे की स्थिति की आकलन रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्री को सौंपेगी। इसके बाद केंद्र सरकार यूपी सरकार द्वारा माँगे गए राहत पैकेज पर विचार कर अंतिम निर्णय लेगी।

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