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सरकार सूखा व बाढ के प्रति गंभीर नहीं

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सूखा एवं बाढ पीडितों की सहायता के प्रति गंभीर नहीं है।

पाल ने आज यहां पत्रकारों से कहा कि प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने राज्य के 57 जिलों को कागजों पर ही सूखाग्रस्त घोषित किया है। प्रदेशवासियों को रामभरोसे छोड दिया। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पीडितों की सहायता के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।
 
सूखे की मार से लोग अभी उबर भी नहीं पाए थे कि बाढ ने बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, बहराइच, कुशीनगर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी समेत आठ जिलों के सैकडों गांव को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ प्रभावित लोगों को अभी राहत सामग्री नहीं मिल सकी है और लोग गांव से पलायन कर रहे हैं।
 
कांग्रेस सांसद ने राज्य सरकार से बाढ एवं सूखा पीडितों के लिए राहत कार्य शुरु करने और प्रभावित क्षेत्रों के सभी स्कूली बच्चों के शुल्क आदि माफ करने की मांग की है। उन्होंने सरकार से प्रभावित जिलों के सीमांत किसानों का कर्ज माफ करने और प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को बचाने के लिए सिंचाई की व्यवस्था करने की भी मांग की है।
 
उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में कल दिल्ली में हुई पार्टी कार्य समिति की बैठक में कांग्रेस सांसदों ने अपने वेतन का 20 प्रतिशत धन सूखा राहत के लिए प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से अन्य राजनीति दलों विशेष रुप से उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री को सीख लेकर सूखा पीडितों को राहत और सहायता के लिए प्रयास तेज करना चाहिए।

 

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