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आडवाणी और जसवंत के विचारों में फर्कः भाजपा

आडवाणी और जसवंत के विचारों में फर्कः भाजपा

भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी से निष्कासित वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह के विचारों में फर्क है।

आडवाणी ने स्व.जिन्ना के बारे में पाकिस्तान की जनता को समझने के लिए एक रणनीतिक बयान दिया था जबकि जसवंत सिंह ने पार्टी के वैचारिक सिद्धांतों की अवहेलना कर अनुशासनहीनता की है। भाजपा की शिमला में हो रही तीन दिन की चिंतन बैठक के दूसरे दिन राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस में जिन्ना के बारे में आडवाणी और जसवंत सिंह के विचारों पर स्पष्टीकरण दिया।

जेटली ने कहा कि आडवाणी ने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना द्वारा वहां की संविधान सभा में दिए गए भाषण मात्र का उल्लेख पाकिस्तानी नागरिकों को समझाने के लिए किया था कि जिन्ना पाकिस्तान को धर्म निरपेक्ष राष्ट्र बनाना चाहते थे। जेटली ने कहा कि जिन्ना के संबंध में आडवाणी के रणनीतिक बयान के बाद पार्टी ने 2005 में एक प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट कर दिया था कि जिन्ना देश के बंटवारे के लिए जिम्मेदार थे।

इस प्रस्ताव का आडवाणी ने भी समर्थन किया था। जेटली ने कहा कि जसवंत सिंह ने अपनी पुस्तक को इस संदर्भ में दिए गए बयानों में कहा है कि जिन्ना को भारत में एक खराब व्यक्ति के रुप में पेश किया गया और सदार बल्लभभाई पटेल भी देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार थे।

जसवंत सिंह द्वारा महज एक किताब लिखने के लिए पार्टी से निष्कासन को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिए जाने पर जेटली ने कहा कि जिन्ना के बारे में पार्टी के प्रस्ताव में अपनी वैचारिक स्थिति स्पष्ट कर दी थी। पार्टी सरदार पटेल को देश को जोड़ने वाला नेता मानती है।

जेटली ने कहा कि पार्टी का कोई भी नेता या कार्यकर्ता पुस्तक लिखता है तो पार्टी को सामान्यतः एतराज नहीं होता है। पार्टी चाहती है कि लोग पढ़ें लिखें। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि वह लिखते हैं, मुद्दा यह है कि वे क्या कहते है और क्या लिखते हैं।

उन्होंने कहा कि पार्टी ने एक बार जब जिन्ना के बारे में स्थिति स्पष्ट कर दी तो उसके बाद फिर उनको जिन्ना के बारे में ऐसी किताब नहीं लिखनी चाहिए थी जो पार्टी की विचारधारा के विपरीत हो। जसवंत सिंह को कारण बताओ नोटिस भी नहीं जारी किए जाने पर जेटली ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उसके संविधान के मुताविक पार्टी के संसदीय बोर्ड को किसी के भी खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान कुछ लोग पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ जब चुनाव लड़ते हैं तो उनके खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है।

यह पूछे जाने पर कि जसवंत सिंह को पार्टी में दोबारा शामिल किया जा सकता है तो उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी से बुधवार को ही निष्कासित किया गया है। वह कोई भविष्यवक्ता नहीं है कि यह बता सकें कि आगे क्या होगा।

यह पूछने पर कि जसवंत सिंह की पुस्तक पर गुजरात सरकार ने प्रतिबंध लगाया है, क्या और भी भाजपा शासित राज्य ऐसा निर्णय ले सकते हैं। जेटली ने कहा कि राज्य सरकारों को पुस्तकों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार प्राप्त है। पुस्तकों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून में प्रावधान है। यह ध्यान दिलाने पर कि पार्टी ने एक अन्य वरिष्ठ नेता अरुण शौरी ने जिन्ना विवाद पर आडवाणी और जसवंत सिंह के विचारों पर सवाल खडे़ किए हैं क्या उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। जेटली इस प्रश्न को टाल गए। राजस्थान के विपक्ष की नेता वसुंधरा राजे द्वारा अपने पद से अब तक इस्तीफा नहीं दिए जाने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना संबंधी प्रश्नों का भी उत्तर नहीं दिया और कहा कि चिंतन बैठक में इस तरह के किसी मुद्दे पर विचार नहीं किया गया।

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