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26 जनवरी, 2020|7:50|IST

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सडक बजट आवंटन में भेदभाव कर रही है सरकार

दिल्ली नगर निगम में सदन के नेता सुभाष आर्य ने राष्ट्रीय राजधानी की सडकों को बनाने ओर इनके रखरखाव के लिए बजट आवंटन में दिल्ली सरकार के सौतेलेपन की कडी आलोचना की है।

श्री आर्य ने आज संवाददाता सम्मेलन में इस संबंध में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की 2007-08 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में मार्च 2007 की स्थिति के अनुसार कुल 30 हजार 923 किलोमीटर सडकों का नेटवर्क है। इन सडकों के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी निगम, लोक निर्माण विभाग, पीडब्ल्यूडी, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, एनडीएमसी और दिल्ली छावनी बोर्ड के पास है।
 
सडकों के कुल नेटवर्क में से 27139 किलोमीटर की जिम्मेदारी निगम के पास है, जबकि दिल्ली सरकार का पी डब्ल्यूडी विभाग केवल 2350 किलोमीटर की देखरेख करता है। निगम 27139 किलोमीटर में से 16826 किलोमीटर लंबाई की शहरी सडकों की देखभाल करता है और पीडब्ल्यूडी 2350 किलोमीटर लंबाई की, किन्तु इनके निर्माण के लिए पिछले सात वर्ष में निगम की तुलना में विभाग को 15 से 53 गुणा तक अधिक कोष आवंटित किया गया।
 

श्री आर्य ने कहा कि निगम कम संसाधन होने के बावजूद अपने अधीन आने वाली सडकों के बेहतर रखरखाव के लिए प्रयासरत है। पिछले वित्त वर्ष में निगम ने गैर योजना मद से सडकों के रखरखाव के लिए 100 करोड रुपए मुहैया कराए थे। पी डब्ल्यू डी के आंकडे उपलब्ध नहीं कराने की वजह से निगम बजट आवंटन में वृद्धि के लिए दिल्ली सरकार के समक्ष अपना पक्ष भी नहीं रख पाया।

वर्ष 2008-09 निगम को केवल 125.38 करोड़ रुपए आवंटित किए गए जबकि विभाग को आठ गुणा अधिक 915 करोड़ रुपए दिए गए। इस राशि के आधार पर निगम का प्रति किलोमीटर खर्च महज 74 हजार रुपए रहा, जबकि विभाग का 53 गुणा ज्यादा 38.94 लाख रुपए था। चालू वित्त वर्ष में यह राशि क्रमश 75 करोड़ और 206.30 करोड़ रुपए हैं।

इस राशि के तहत निगम को केवल 44 हजार रुपए प्रति किलोमीटर मिलेंगें, जबकि विभाग 20 गुणा अधिक 8.78 लाख रुपए प्रति किलोमीटर खर्च करेगा। श्री आर्य ने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से निगम को सडकों की लंबाई के आधार पर राशि आवंटित किए जाने की मांग की है।

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