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विद्यापीठ में कई परीक्षार्थियों की एमए द्वितीय वर्ष की परीक्षा निरस्त

बीएड की डिग्री पाने के लोभ में पीजी कोर्स बीच में छोड़ना महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में कई छात्र-छात्रओं को महंगा पड़ गया। विभिन्न विभागों के करीब एक दजर्न छात्र-छात्रओं के पीजी के परीक्षाफल निरस्त कर दिए गए हैं। अब ये परेशान-हाल घूम रहे हैं। कई तो यह जानकर फफककर रो पड़े।

हुआ यह है कि इन छात्र-छात्रओं ने एमए प्रथम वर्ष में दाखिला लिया। प्रथम वर्ष की परीक्षा दी। द्वितीय वर्ष में वे दूसरे विश्वविद्यालयों की बीएड प्रवेश परीक्षा में बैठे और पास हो गए। इसके बाद  उन्होंने विद्यापीठ से माइग्रेशन ले लिया। वहां से बीएड करने के बाद फिर अगले साल एमए द्वितीय वर्ष में प्राइवेट परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा दे दी। इसमें कई तो अच्छे नंबरों से पास हुए।

जब वे मार्कशीट लेने पहुंचे, तो उनसे माइग्रेशन की मांग की गई, तब वास्तविकता का पता चला। विश्वविद्यालय के नियमों के मुताबिक एक बार विश्वविद्यालय से माइग्रेशन लेने के बाद संस्था के छात्र के रूप में मान्यता समाप्त हो जाती है। विश्वविद्यालय परीक्षा में शामिल होने से पहले पूर्व छात्र को फिर से पंजीकरण कराना होगा। इन छात्र-छात्रओं ने दोबारा पंजीकरण कराए बिना एमए दूसरे साल की परीक्षा दे दी।

मामला खुलने पर परीक्षा विभाग ने ऐसे सभी छात्र-छात्रओं के रिजल्ट रोक दिये। कुछ दिन पहले हुई परीक्षा समिति की बैठक में निर्णय हुआ कि ऐसे सभी छात्र-छात्रओं की दूसरे साल की परीक्षा निरस्त कर दी जाए। अब ऐसे  परीक्षार्थी परीक्षा विभाग का चक्कर लगा रहे हैं और मदद की गुहार कर रहे हैं। परीक्षा नियंत्रक प्रो. नंदलाल का कहना है कि वह नियमों से बंधे हैं।

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  • Web Title:बीच में पीजी कोर्स छोड़, बीएड करना महंगा पड़ा