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नई व्यवस्था में मंडलायुक्तों को जिम्मेदार बनाया गया

मुख्यमंत्री मायावती ने विकास कार्यो और जनहित की योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए समीक्षा की नई व्यवस्था कायम की है। नई व्यवस्था में मंडलायुक्तों का रुतबा बढ़ाते हुए उन्हें सीधे जिम्मेदार बनाया गया है। जबकि सेक्टर प्रभारी अफसरों के औचक निरीक्षण और उनकी मानीटरिंग की वर्तमान व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ आम आदमी को न मिलने पर अब जिलाधिकारी के स्थान पर कमिश्नर दंडित होंगे। मंडल स्तर पर विकास कार्यो और योजनाओं के कार्यान्वयन की स्थिति में सुधार न होने पर मंडलायुक्त को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी और प्रोन्नति रोकी जाएगी। जिला व मंडल के जिलाधिकारियों सहित सभी अधीनस्थ अफसरों से भ्रष्टाचार रहित काम लेने की जिम्मेदारी भी मंडलायुक्तों की होगी। भ्रष्टाचार व लापरवाही की शिकायतों के लिए कमिश्नर सीधे जिम्मेदार होंगे। कार्यो में गड़बड़ी के लिए जिलाधिकारी से जवाब-तलब के बजाए कमिश्नर नपेंगे।

मुख्यमंत्री बुधवार को यहाँ अपने आवास पर प्रदेश भर के मंडलायुक्तों के साथ जनहित के कार्यक्रमों और योजनाओं की समीक्षा कर रही थीं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह तहसील दिवस पर डीएम और मंडलायुक्त द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों में दो-दो तहसीलों का आकस्मिक निरीक्षण किया जाएगा। जन समस्याओं के निराकरण के लिए डीएम, एसएसपी-डीआईजी प्रत्येक सोमवार, वृहस्पतिवार और शुक्रवार को अपने-अपने कार्यालय में सुबह 10 बजे से 12 बजे तक उपस्थित रहेंगे।

मायावती ने मंडलायुक्तों से साफ कहा कि उन्हें अब रिजल्ट चाहिए नहीं तो कठोर एक्शन होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मई 2007 में सरकार बनने के बाद ही उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया था। लेकिन इसके बावजूद विकास कार्यो में जितनी तेजी और योजनाओं के कार्यान्वयन में गुणवत्ता व पारदर्शिता होनी चाहिए, वह संतोषजनक नहीं रही। इसमें और अधिक सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अब कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी। विकास कार्य फाइलों से निकलकर जमीन पर दिखना चाहिए।

इसके साथ ही कानून व्यवस्था बेहतर बनाना चाहिए। क्योंकि कानून व्यवस्था खराब होने पर विकास कार्यो को गति नहीं मिल पाती। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी की जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति को आगे नहीं चलने दिया जाएगा और अफसरों की जिम्मेदारी तय करके कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार समीक्षा से यह बात स्पष्ट हुई कि वरिष्ठ अधिकारी जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर ही निर्भर रहे, जबकि उन्हें अपने स्तर से प्रयास करने चाहिए थे।

उन्होंने कहा कि एक समय मंडलायुक्त की प्रशासनिक कार्योँ पर मजबूत पकड़ थी और आम जनता के मन में उनके प्रति अच्छी छवि थी। लेकिन उनकी निष्क्रियता से आम लोगों के बीच इनकी छवि प्रभावित हुई।

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