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रिलायंस पावर प्रोजेक्ट पर सहयोग सोसायटी ने उठाई आपत्ति

किसानों की उपजाऊ जमीनों को राज्य और केंद्र सरकारों को जबरन कब्जा नहीं करना चाहिए। अगर सरकार यहां ऐसा प्रयास करेगी तो इस इलाके को भी सिंगूर और नंदीग्राम बनते देर नहीं लगेगी। उद्योगपतियों को अपनी सीमाओं में रहना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वे अदालती कार्यवाही से पहले ही सब कुछ हासिल कर लेना चाहते हैं।

यह बात सहयोग सोसायटी के अध्यक्ष राजीव त्यागी ने कही है। सहयोग सोसायटी रिलायंस पावर प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलनरत किसानों के न्याय के लिए बनाई है। मामला अदालत में हैं, जिसके कारण रिलायंस इस बारे में कोई जवाब देने को तैयार नहीं है। रिलायंस पावर प्रोजेक्ट के अंतर्गत लगभग ढाई हजार एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है। ये सभी जमीन उपजाऊ है। यह जमीन सरकार ने जबरन किसानों से मारपीट कर कब्जा ली है।

इस आंदोलन में पूर्व प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह भी शामिल हुए थे। सहयोग सोसायटी के अध्यक्ष ने कहा कि हमारी लड़ाई अब भी जारी है। और लड़ाई जब तक जारी रहेगी जब तक किसानों को न्याय नहीं मिल जाता है। त्यागी ने बताया कि सौ से अधिक किसानों ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया है। हमें देश की अदालत पर पूरा भरोसा है। हमें न्याय चाहिए लेकिन इसके बाद भी हम इस बात से चिंतित हैं कि अनिल अंबानी जैसे धनी लोग कानून बदलवाने की कोशिश में रहते हैं।

सहयोग सोसायटी के अध्यक्ष के अनुसार ऐसे लोग अदालती आदेशों को किसी प्रकार की तवज्जो नहीं देते हैं। ऐसे लोग ठेकेदारों के दम पर किसानों को उनकी जमीनों से जबरदस्ती बेदखल करवा देते हैं। हम ऐसे लोगों की पहुंच और पैसे से बहुत ज्यादा परेशान हैं। वे कुछ भी कर सकते हैं। वे कहते हैं कि हम बस इतना चाहते हैं कि किसानों की अधिकारों की रक्षा हर कीमत पर होनी चाहिए। रिलायंस के पावर प्रोजेक्ट के खिलाफ अभी भी हजारों किसान अपनी उपजाऊ जमीन के लिए आंदोलनरत हैं।

 

 

 

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  • Web Title:सरकार तो नहीं करे जमीन का अवैध कब्जा