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26 फरवरी, 2020|3:52|IST

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सरकारी खजाने पर पहला हक आपदा पीड़ितों का: नीतीश

 सूखा पैकेज की मांग करके पटना लौटे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सरकारी खजाने पर पहला हक आपदा पीड़ितों का है। कोसी प्रलय पर केन्द्र का रवैया निराशाजनक रहा है लेकिन मैं निराश होने वाला व्यक्ति नहीं हूं। मुङो पूरी उम्मीद है कि केन्द्र सूखा संकट से मुकाबले के लिए हमें जरूरत के हिसाब से सहायता देगा। राज्य सरकार अपनी पूरी क्षमता के साथ सूखे का मुकाबला कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बुधवार को केन्द्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और गृह मंत्री पी.चिदम्बरम से भी मिलकर सूखा पैकेज के साथ-साथ कोसी पुनर्वास के लिए राशि की मांग की। हालांकि भाजपा नेता जसवंत सिंह के निष्कासन संबंधी सवाल पर कुछ बोलने की बजाय मुख्यमंत्री मीडियाकर्मियों की तरफ हाथ जोड़ते हुए सीधे अपनी कार में जा बैठे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा पर बैठक में ही बिहार में सूखा की स्थिति पर प्रधानमंत्री से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री को राज्य सरकार की तरफ से भेजा गया 23071 करोड़ रुपये की विशेष सहायता की मांग संबंधी पत्र मिल गया है। वह उस पर विचार कर रहे हैं। केन्द्र से 31 मेगावाट बिजली के अतिरिक्त आवंटन पर आश्चर्य जताते हुए उन्होंने कह कि राज्य सरकार ने 300 मेगावाट बिजली की मांग थी।

मैंने केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री को भी बता दिया कि उनकी यह मदद ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ है। हमारे सामने दो बड़ी चुनौती है। पहला रोपनी हो चुके धान के पौधों को बचाना और दूसरा लाखों परिवारों को भूख से बचाने के लिए अनाज उपलब्ध कराना। फसल बचाने के लिए किसानों को चार पटवन के लिए डीजल सब्सिडी दी जा रही है। मुङो खुशी है कि केन्द्र डीजल सब्सिडी के ‘बिहार मॉडल’ को पूरे देश में लागू करने जा रहा है।

बिहार के आठ राजनीतिक दलों ने संयुक्त ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर दिया है। केन्द्रीय मंत्रियों से मुलाकात के दौरान हमने सर्वदलीय ज्ञापन भेजे जाने की भी जानकारी उन्हें दे दी थी। हमने केन्द्र से नरेगा के गाइड लाइन को अधिक स्पष्ट करने की मांग की है ताकि जल संसाधन और लघु जल संसाधन विभाग भी अपनी योजनाओं पर काम करा सकें।

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