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डॉक्टरों ने दिया, शिशु को नया जीवनदान

समय से पहले जन्मा शिशु देव यादव हाइड्रो सिफलस बीमारी से ग्रस्त था। उसका वजन मात्र आठ सौ ग्राम था। मगर, डॉक्टरों की कुशलता व मेडिकल टेक्नोलॉजी के कारण 90 मिनट की सर्जरी के बाद शिशु को नया जीवनदान दिया गया।

शिशु का इलाज करने वाले डॉक्टर के अनुसार नवजात के मस्तिष्क में मौजूद सेरीब्रो- स्पाइनल फ्लूड सामान्य से अधिक हो गया था। नतीजतन मस्तिष्क दबने की वजह से  उसकी गतिविधियां कम हो गई थी। अब सजर्री के बाद शिशु स्वस्थ है।

गर्भ ठहरने के सात माह बाद ही शिशु देव का जन्म हो गया। इस कारण शिशु का शारीरिक विकास नहीं हो पा रहा था। वह स्तनपान करने में भी असमर्थ था। उसके अभिभावकों ने कई अस्पतालों के चक्कर काटे। मगर, उसका इलाज नहीं हो सका।

इसके बाद डीएलएफ स्थित आर्टिमस अस्पताल में शिशु को इलाज के लिए भर्ती किया गया। डॉक्टर ने उसे हाइड्रो सिफलस से ग्रस्त बताया। शिशु की सजर्री करने वाले अस्पताल के कंसलटेंट - न्यूरोसजर्री डॉ. अरूण सरोहा ने बताया कि बच्चे के शरीर में एक शंट डाला गया।

इसके जरिए मस्तिष्क व पेडू (एब्डोमेन) को आपस में जोड़ा गया। ताकि मस्तिष्क में मौजदू अनावश्यक सीएसएफ को निकालकर उसे एब्डोमिनल कैविटी में भेजा गया। जहां से इसे अवशोषित किया गया। यह ऑपरेशन करीब 90 मिनट तक चला। इसके बाद शिशु को दो दिन तक आईसीयू में रखा गया।

डॉ. सरोहा के अनुसार नवजात देव का वजन बहुत कम होने के कारण सर्जरी काफी जटिल और जोखिमपूर्ण थी। मासूम का जीवन बचाने के लिए उन्होंने वेंट्रिक्यूलर परीटोनियल शंट प्रक्रिया अपनायी। अब शिशु स्वस्थ है।

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