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हर पंचायत में होगा मॉडल शवदाह गृह

 बिहार की हर पंचायत में बनाया जाएगा मॉडल शवदाह गृह। अब लाशों को जलाने के लिए परिजनों को कोई फजीहत ङोलनी नहीं पड़ेगी। न जगह की तलाश करनी होगी न बहुत लकड़ी की खोज में इधर-उधर भटकना पड़ेगा। बस थोड़ी सी लकड़ी का जुगाड़ हो जाए तो बंधी आंच में पूरी लाश जलाई जा सकेगी।

पर्यावरण की रक्षा होगी सो अलग। नरेगा की राशि से पूरी की जाने वाली इस योजना का स्वरूप ग्रामीण विकास विभाग ने तैयार कर लिया है। 26 अगस्त को विभाग में होने वाली उपविकास आयुक्तों की बैठक में इस पर विचार कर अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उसके बाद तो विभाग को सिर्फ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हरी झंडी का इंतजार होगा जिसके मिलते ही इसपर काम शुरू कर दिया जाएगा।

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हर पंचायत में बनने वाले शवदाह गृहों का मॉडल एक समान होगा। कई तरह के मॉडलों पर विचार किया जा रहा है। सबसे उपयोगी और कम लागत वाले मॉडल का चयन कर उप विकास आयुक्तों की बैठक में उस पर चर्चा की जाएगी। शव दाह गृह पंचयत की उसी सार्वजनिक भूमि पर होगी जो तालाबों या नदी के किनारे हो और पहले से वहां शव जलाये जाते हों। इसका आकर बड़े चूल्हे जैसा होगा लेकिन इसमें शवों को जलाने में लकड़ी की खपत कम होगी। खासबात यह है कि इसमें ईंट भठ्ठों की तरह चिमनी भी होगी जिससे पर्यावरण को दूषित होने से बचया जा सकता है।

विभाग के प्रधान सचिव विजय प्रकाश ने बताया कि गांवों में लकड़ी की कमी से कई बार लोग आधजली लाशों का ही प्रवह नदी या तालाबों में कर देते हैं। बरसारत के दिनों में लकड़ी की कमी से परेशानी तो होती ही जमीन की उपलब्धता को लेकर भी लोग फजीहत ङोलते हैं। घर में मौत होने पर गरीबों के सामने सबसे बड़ी समस्या यही होती है। मॉडल शवदाह गृह होने से ऐसी कोई समस्या नहीं रह जाएगी। योजना को अभी अंतिम रुप दिया जाना बाकी है लेकिन यह तय है कि इसे नरेगा की राशि से बनाया जाएगा।

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