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असहनीय सम्मान!

अगर आप सम्मान के लायक हैं और सम्मान पाते रहते हैं तो कुछ वक्त बाद इसकी लत पड़ जाती है। पैर, हर वक्त छुए जाने के लिए फड़फड़ाते रहते हैं।  हाथ, आशीर्वाद देने के लिए मचलते हैं। कान के पर्दे, तारीफ के बूटों से सजने के लिए बेकरार होते हैं। शहर से बाहर जाते समय ऐसे लोग तारीफ के ऑडियो कैसेट साथ ले जाते हैं। तारीफ न होने पर इनके मुंह से झग आने लगता है। तारीफ के नशेड़ियों को हर घंटे उसकी निश्चित डोज़ चाहिए ही होती है। मगर समाज में एक तबका मुझ जैसों का भी है, जिनका कभी इज्जत से वास्ता नहीं पड़ता।

इज्जतविहीन जीवन जीनें की जिन्हें आदत सी पड़ जाती है। मगर पिछले दिनों कुछ ऐसा हुआ की इज्जत न होने के बावजूद मैंने खुद को बेइज्जत महसूस किया। हुआ ये कि मुझे एक पोस्टकार्ड मिला। जिसका मजमून था, महोदय, आपकी साहित्यकला सेवा पर आपको हिंदी भाषा आचार्य की वृहद् मानद उपाधि देने हेतु विषय-विचाराधीन है। आपका परिचय, 2 चित्र रंगीन पासपोर्ट साइज, 2 रचना तथा ‘500 रुपये सहयोग शुल्क’ एमओ द्वारा भेजें। भवदीय.. फलाना ढिमकाना।

पहली बात जो पोस्टकार्ड पढ़ मेरे जहन में आई वो ये कि ‘हिंदी भाषा आचार्य’ पुरस्कार की बात अगर मेरी दसवीं की हिंदी टीचर को पता लग जाए तो वो संस्था पर राष्ट्रभाषा के अपमान का केस कर दें। मेरी हिंदी तो ऐसी है कि शुरुआती रचनाएं इस खेद के साथ वापस लौटा दी गई कि हम केवल हिंदी में रचनाएं छापते हैं!

दूसरा जो संस्था मेरी साहित्यकला सेवा (ऐसा गुनाह जो मैंने किया नहीं) के लिए मुङो सम्मानित करना चाहती है, उसे मेरी दो रचनाएं क्यों चाहिए! क्या हिंदी भाषा आचार्य की यही पात्रता है कि जिस किसी ने भी हिंदी में दो रचनाएं लिखी हैं, वो इसका हकदार है। इसके अलावा जो संस्था मुझे सम्मानित करने का दुस्साहस कर रही है, आखिर वो पांच सौ रुपये का सहयोग क्यों मांग रही है? किसी को व्हील चेयर का वादा कर आप उससे बैसाखियों के लिए उधार क्यों मांग रहे? मैं जानना चाहता हूं कि ‘तुम मुझे सहयोग (राशि) दो, मैं तुम्हें सम्मान दूंगा’ ये नारा आखिर किस क्रांति के लिए दिया जा रहा है।

कहीं ऐसा तो नहीं कि जो कुछ और जैसा कुछ मैंने आज तक लिखा है, उससे उन्होंने यही निष्कर्ष निकाला कि इतना घटिया लिखने वाला आदमी ही सम्मान के झंसे में पांच सौ रुपये दे सकता है। सोचता हूं कि मेरे लिखे से जिन्होंने मेरे चरित्र का अंदाजा लगाया, अगर वो आर्थिक स्थिति का भी लगा पाते तो कम से कम उनके पोस्टकार्ड के पैसे तो बचते।

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