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फौजी की मौत से खौफजदा गांव वाले

एक दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग कार्यशाला आयोजित कर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वाइन फ्लू नहीं फैलने देने का दावा कर रहा था। उसके अगले दिन ही एक गांव के फौजी की कथित तौर पर स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। इसके बाद से यमुना किनारे बसे मंझवली के लोग बेहद खौफजदा है।

उन्हें भय साल रहा है कि  कहीं यह जान लेवा रोग उनके घर में न दस्तक देना शुरु करे। जबकि इस बारे में स्वास्थ्य विभाग को कोई जानकारी नहीं। इस बारे में पूछने पर विभाग के अधिकारी ने इसे अनभिज्ञता जाहिर की।

गांव में पिछले काफी दिनों से वायरल फैला हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ऐसा कोई घर नहीं, जहां कोई वायरल से पीड़ित मरीज न हो। गांव के पंचायत सदस्य जीतराम का कहना है कि सफाई व्यवस्था नहीं रहने से बीमारी को फैलने का मौका मिल गया है। मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ा हुआ है। पिछले दो साल से स्वास्थ्य विभाग ने इस गांव को भगवान भरोसे छोड़ रखा है। उन्हें भी डेंगू हो चुका है।

जिसके इलाज पर 60 हजार रुपये खर्च आए। गांव के कपिल यादव ने बबताया कि गांव में वायरल महामारी का रूप ले चुका है। वास्तव में फौजी राकेश की मौत स्वाइन फ्लू से हुई है तो गांव पर यह एक और गंभीर खतरा मंडराने लगा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से  गांव में दवा छिड़काव की व्यवस्था नहीं है। गांव में एक आयुर्वेदिक औषधालय है। जिसमें भी डॉक्टर यदा-कदा आते हैं।

उनके लिए गांव कौराली का सरकारी अस्पताल भी है। वहां भी डॉक्टर समय पर उपलब्ध नहीं होते। इस कारण ग्रामीणों को निजी डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है। इधर, जिला आयुर्वेदिक इंचार्ज डॉक्टर सतीश खटकड़ का कहना है कि गांव के औषधालय के लिए जो बिल्ड़िंग है। वह खंडहर में तब्दील हो चुकी है। कभी भी गिर सकती है। इस कारण वहां तैनात महिला डॉक्टर औषधालय के पड़ोस में बैठती हैं।
 

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  • Web Title:स्वाइन फ्लू से मौत