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स्वाइन फ्लू की रोकथाम को ठोस उपाय नहीं

स्वास्थ्य विभाग जिले में स्वाइन फ्लू के बढ़ते खतरे का इंतजार कर रहा है। इसकी रोकथाम के लिए अब तक ठोस खाका तैयार नहीं किया गया है। जबकि विशेषज्ञ विभाग को लगातार आगाह कर रहे हैं कि तापमान में गिरावट आने के बाद स्वाइन फ्लू के मरीजों में तेजी से वृद्धि होगी।
 
जिले में स्वाइन फ्लू के संभावित मरीजों में निरंतर वृद्धि हो रही है। अब तक संभावित मरीजों की संख्या 157 तक पहुंच गई है। इसमें तीन कन्फ्रम मरीजों की पहचान हो चुकी है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखकर ही प्रदेश सरकार ने इस रोग को महामारी घोषित कर दिया है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे। इसकी रोकथाम के नाम पर अब तक कुछ जगहों पर जनजागृति कैंप ही लगाए गए हैं।

दूसरी तरफ विशेषज्ञ डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग को आगाह कर चुके हैं कि तापमान में गिरावट के साथ इसके मरीजों में बढ़ोतरी होने का खतरा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ. कृष्ण कुमार का कहना है कि 20 से 25 डिग्री तापमान में इसका वायरस ज्यादा एक्टिव होता है। वायरस की लाइफ साइकिल भी सामान्य मौसम की तुलना में जाड़े में दो से चार घंटे बढ़ जाती है। स्वाइन फ्लू की रोक-थाम के इंचार्ज डॉ. अरविंद लोहान भी मानते हैं कि आम वायरस की तुलना में इसके वायरस ज्यादा चतुर होते हैं।

यहां तक कि सर्दी में कमजोर वायरस भी एक्टीव हो जाता है। जिनमें बीमारी से लड़ने की क्षमता कम होती है। उस पर वायरस का समूहएक साथ अटैक करता है। पीएमओ डॉ. एसएन शर्मा का कहना है कि जिले में अभी स्वाइन फ्लू को लेकर गंभीर स्थिति नहीं है। हालात गंभीर होने पर इंतजाम कर लिया जाएगा।

 

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