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उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर, लाखों प्रभावित

नेपाल से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से उत्तर प्रदेश की कई नदियां उफान पर हैं और सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आकर डूब गये हैं।

उत्तर प्रदेश के बहराइच, सिद्धार्थनगर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, श्रावस्ती, कुशीनगर जिलों में बहने वाली घाघरा, सरयू, शारदा, राप्ती, बूढ़ी राप्ती और घोघी नदियां या तो खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं या खतरे का निशान तक पहुंचने वाली हैं, जिससे इन जिलों के सैकड़ों गांव जलमग्न हो गये हैं। लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक पिछले चार-पांच दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और पिछले 48 घंटों में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बनबसा बैराज से लगभग पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से ये नदियां खतरे के निशान से ऊपर बहने लगी हैं और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है।

बाढ़ की सबसे विकट स्थिति बहराइच जिले में है। यहां पर करीब 200 गांव पूरी तरह डूब चुके हैं, जिससे एक लाख से अधिक लोग बेघर हो गये हैं।

बहराइच के जिलाधिकारी सुभाष चंद्र शर्मा ने बुधवार को बताया कि जिले में बाढ़ की स्थिति भयावह हो गई है। घाघरा, सरयू और शारदा नदियों के जलस्तर में लगभग हर घंटे दो सेंटीमीटर की बढ़ोतरी देखी जा रही है।

शर्मा ने बताया कि प्रशासन ने हाई अलर्ट घोषित कर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। बचाव कार्यो में प्रांतीय सशत्र बल(पीएसी) की मदद ली जा रही है और प्रभावित लोगों को मोटरबोट तथा नौकाओं की मदद से सुरक्षित स्थानों की तरफ ले जाया जा रहा है।

बहराइच की तरह ही सिद्धार्थनगर में बूढ़ी राप्ती, बाणगंगा और घोघी नदी, सीतापुर में घाघरा नदी, पीलीभीत में शारदा, श्रावस्ती में राप्ती व सरयू नदी और कुशीनगर में गंडक नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारी शशिकांत शर्मा ने बताया कि करीब 50 गांव बाढ़ की चपेट में आ गये हैं। प्रभावित इलाकों में राहत व बचाव कार्य जारी है। निचले इलाकों को खाली करने के निर्देश दिये हैं।

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