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आओ रोशन करें जहां

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सूरज ढलते ही यदि बिजली भी अगली सुबह तक के लिए अपनी आंखें बंद कर ले तो पूरी रात जेनरेटर की घड़घड़ सुनने  या फिर थोड़ी-सी रोशनी के लिए मोमबत्ती के धुएं के साथ संघर्ष करने की मजबूरी हो जाती है। और यदि यह सिलसिला हर रोज का हो तो फिर बच्चों की पढ़ाई का नुकसान, धुएं से बिगड़ती सेहत और कई छोटे-बड़े काम अंधेरे में ही पूरे करने की मजबूरी के बारे में सोच कर ही आंखों के सामने अंधेरा छाने लगता है। जाहिर है ऐसी किसी भी स्थिति में सबसे अधिक नुकसान महिलाओं को ही झेलना पड़ता है। इस बात को अपनी नियति मान कर नहीं बैठने वाली  गांव देहात की महिलाएं अब अपने घरों के साथ-साथ गांव के अनेक घरों में रोशनी करने का बीड़ा उठा रही हैं। साथ ही खुद को सोलर इंटरप्रिन्योर के रूप में विकसित कर रही हैं।

द एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टिटय़ूट ‘टेरी’ की ‘लाइटिंग ए बिलियन लाइव्स’ की योजना से जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो  अनेक घरों में सौर ऊर्जा  पहुंचाती हुई न सिर्फ खुद को उद्यमी बना रही हैं, बल्कि समाज के आर्थिक व सामाजिक विकास में भी योगदान दे रही हैं। भारत की ही बात करें तो दुनियाभर में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता से महरूम हर चौथा व्यक्ति भारतीय है। चालीस करोड़ भारतीयों समेत विश्वभर के कुल 1.6 अरब लोगों तक बिजली की पहुंच को संभव बनाने के लिए टेरी ने विशेष तौर पर सोलर लालटेन का निर्माण किया है। इस योजना के तहत पूरे गांव में से एक व्यक्ति (प्रमुख रूप से महिलाएं) के साथ सोलर लालटेन प्रोजेक्ट का समझोता होता है। टेरी द्वारा उस व्यक्ति को सोलर लालटेन व सौर पैनल उपलब्ध कराया जाता है। वह व्यक्ति सौर पैनल की मदद से दिन में लालटेनों को चार्ज करता है, जिन्हें रात के समय गांव वालों को उचित किराए पर उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना से बिजली की अपर्याप्त उपलब्धता के कारण दुनियाभर में 20 करोड़ ग्रामीण परिवारों की केरोसीन और परंपरागत ऊर्जा के स्रोत जैसे गोबर के उपले और लकड़ी पर निर्भरता को कम किया जा सकेगा। एक अनुमान के अनुसार, एक सोलर लालटेन के दस साल इस्तेमाल करने से पावर जनरेशन लेवल पर 2.8 टन कार्बन डाइ ऑक्साइड कम करने में मदद मिलेगी।

अब सवाल यह है कि इस योजना में महिलाओं को ही प्राथमिकता क्यों दी जा रही है? शोध बताते हैं कि महिलाएं नए डिजाइन और उत्पाद का इस्तेमाल करने में उत्सुक रहती हैं और उनका इस्तेमाल करने में गर्व महसूस करती हैं। दूसरी तरफ पुरुष अच्छे अवसरों की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं। इस तरह अधिक संख्या में महिलाओं को जोड़ना न सिर्फ महिलाओं को सशक्त बनाना है, बल्कि गांवों के स्थायी विकास को सुनिश्चित करना भी है। नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. राजेंद्र पचौरी के तत्वाधान में ‘लाइटिंग ए मिलियन लाइव्स’ योजना वर्ष 2007 में शुरू हुई थी, जो अब लाइटिंग ए बिलियन लाइव्स के रूप में तब्दील हो चुकी है। भारत समेत विदेश के कई देश भी टेरी के इस प्रोजेक्ट में जुड़ गए हैं।

 उत्तरी अमेरिका भी इस योजना के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहा है। कई बड़ी हस्तियां जैसे कुमार मंगलम बिरला, सुष्मिता सेन, प्रीति जिंटा, शोभा डे, फरहान अख्तर, राजेश्वरी और पीयूष पांडे आदि इस प्रोजेक्ट से जुड़ी हैं। एनजीओ के अलावा विभिन्न उद्यमी संस्थाएं व कॉरपोरेट घराने भी सोलर लालटेन प्रोजेक्ट की स्पॉन्सरशिप ले रही हैं। अधिक जानकारी के लिए आप टेरी कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।

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