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कृष्णा के सुझाव पर जागी ऑस्ट्रेलियाई सरकार

कृष्णा के सुझाव पर जागी ऑस्ट्रेलियाई सरकार

शिक्षा के क्षेत्र में पिछले दिनों हुई गतिविधियों के कारण विश्व में खराब हुई अपनी छवि को सुधारने के लिए ऑस्ट्रेलिया नियमों को और कड़ा करने जा रहा है। इसके तहत शिक्षा के बेईमान संचालकों से सख्ती से निपटा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने अपने ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर कहा था कि यहां कई ऐसी यूनिवर्सिटी है जहां आकर विद्यार्थी फंस जाते हैं। उन्होंने कहा था कि दाखिले के समय कोर्स को व्यावसायिक बताकर विद्यार्थियों को फांस लिया जाता है। उन्होंने भारतीय छात्रों को भी आगाह किया था कि वे ऐसे शिक्षा संस्थानों से बचें।

शिक्षा मंत्री जूलिया गिलार्ड ने संसद में इससे संबंधित कानून के संशोधनों का प्रस्ताव पेश किया। गिलार्ड ने संसद से कहा शिक्षा देने वालों को संदेश दिया जाता है कि अगर आप दूसरे देशों से आए छात्रों को सुरक्षित वातावरण में उच्चस्तरीय शिक्षा नहीं दे रहे हैं तो या तो अपने कार्यों में पारदर्शिता रखें अन्यथा आपको अपना संस्थान बंद भी करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में पर्याप्त जांच के बिना बहुत वद्धि हुई है, जिसने बेईमान संचालकों को बहुत आकर्षित किया है। उन्होंने कहा हमें ऐसे बेईमान संचालकों पर लगाम कसनी होगी।

गिलार्ड ने कहा कि मुख्य परिवर्तन के तहत सभी संस्थानों को अब एक कॉमनवेल्थ रजिस्टर ऑफ इंस्टीटयूशंस एंड कोर्सेस फॉर ओवरसीज स्टूडेंटस में अपेक्षाकत कठिन नियमों के अनुसार पुनः पंजीकत होना पड़ेगा। यह अगले साल के अंत तक होगा। इससे शिक्षा दलालों को पारदर्शी होना पड़ेगा। इस संशोधन के बाद संस्थानों को संतुष्टिदायक मानकों पर पहुंचने के लिए योग्यता प्रदर्शित करनी होगी।

गिलार्ड ने कहा कि सभी शिक्षा प्रदाताओं को अपनी दलालों की सूची प्रकाशित करनी होगी, भले ही वे ऑस्ट्रेलिया में हों या कहीं दूसरे देशों में। उन्होंने कहा कि दलालों को उनके गह देशों में पहले प्रशिक्षित और पंजीकत होना होगा। गिलार्ड ने कहा कि सरकार शिक्षा प्रदाताओं से एक वेबसाइट बनाने को भी कह सकती है, जिसका उपयोग छात्र बिना नाम दिए ऐसे दलालों पर टिप्पणी करने के लिए कर सकें।

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