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‘रेलवे संपत्ति को निशाना बनाना गलत’

बिहार में छात्रों द्वारा विरोध जताने के लिए  रेलगाड़ियों को निशाना बनाए जाने के यहां के विशिष्ट लोग सही नहीं ठहराते। उनकी राय है कि रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना किसी भी सूरत में उचित नहीं है।

मंगलवार को बिहटा रेलवे स्टेशन पर छात्रों द्वारा श्रमजीवी एक्सप्रेस के वातानुकूलित डिब्बों में आग लगाने तथा सभी डिब्बों में तोड़फोड़ किए जने से जहां यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा वहीं रेलवे को भी करीब करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा है।

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं कांग्रेस के प्रवक्ता प्रेमचंद मिश्र का कहना है कि यह घटना छात्रों का आक्रोश नहीं बल्कि उनके अपराधिक चरित्र को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि विरोध करने के और भी तरीके हो सकते हैं। उनके अनुसार, ‘‘रेलवे संपत्ति को निशाना बनाना आसान होता है और यह घटना तुरंत मीडिया में सुर्खी बन जती है। इस कारण छात्र इसी को निशाना बनाते हैं। छात्रों की ऐसी करतूते रोकने के लिए समाज तथा अभिभावकों को भी आगे आना होगा।’’

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के संयोजक कुमार परवेज का कहना है कि बिहार में छात्रों को कोई अधिकार नहीं है और ना ही उनका कोई नेतृत्वकर्ता है। छात्रों को राज्य में सम्मान भी नहीं मिलता है। ऐसे में उनमें आक्रोश है जो फट पड़ता है। हालांकि वे भी इसे सही नहीं बताते।

पटना विश्वविद्यालय की प्रेफेसर भारती एस़ कुमार का कहना है, ‘‘छात्रों द्वारा ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया जाना यह दर्शाता है कि छात्र गलत दिशा में जा रहे हैं। बेरोजगारी की समस्या छात्रों में तनाव उत्पन्न कर रही है। यह समस्या गहन जांच का विषय है। दोषी छात्रों पर सरकार को तत्काल अंकुश लगाना चाहिए।’’

उधर, वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र किशोर का कहना है कि बिहार संक्रमणकाल से गुजर रहा है। छात्र ही नहीं बिहार में किसी भी समुदाय पर कानून का डंडा चलाया जाता है तो वे विद्रोह पर उतर जाते हैं। पूर्व की सरकारों के समय लोगों के मन में कानून के प्रति जो इज्जत नहीं थी उसकी खुमारी अब तक लोगों में नहीं टूटी है। उसी का यह परिणाम है।

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