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भ्रूण हत्या के खिलाफ..

भ्रूण हत्या के खिलाफ..

खुशी की बात है कि दिल्ली में महिलाओं का लिंग-अनुपात 1000 पुरुषों की तुलना में 1004 हो गया है। लिंग अनुपात का बढ़ना सरकारी और गैरसरकारी संगठनों की सामूहिक मुहिम से ही संभव हो पाया  है। इस कड़ी में द सेन्टर फॉर सोशल रिसर्च(सीएसआर) द्वारा नई दिल्ली के सबसे कम लिंग अनुपात क्षेत्रों (पंजाबी बाग, नरेला, नजफगढ़) में चलाई गई मुहिम ‘मेरी शक्ति मेरी बेटी’ सहायक साबित हुई है। इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए सीएसआर ने इस वर्ष हरियाणा में कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ फाइट अगेंस्ट फीमेल फोएटेसाइड योजना शुरू करने का निर्णय लिया है। वुमन पावर कनेक्ट के साथ शुरू की जाने वाली इस मुहिम में सीएसआर समूहों को केन्द्र बना कर भ्रूण हत्या के विरोध में जागरूकता अभियान प्रारम्भ करेगी। रैली, समूहों में विचार-विमर्श और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से राज्य में भ्रूण हत्या के विरोध में प्रदर्शन किया जाएगा।

देश में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा कुछ ऐसे राज्य हैं, जो दूसरे  बड़े राज्यों की तुलना में ज्यादा समृद्ध माने जाते हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि यही राज्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों को गर्भ में ही मार डालने के मामले में सबसे आगे रहे हैं।
 
‘दिल्ली में हमारे सामुदायिक जागरूकता अभियान से हमने उन समूहों पर चौकस होकर नजर रखी, जो लिंग जांच कर उन्हें गर्भ में ही मार देते हैं।  हमें आशा है कि हम इसी तरह का सफलतम अभियान हरियाणा में भी चला पाएंगे।’ यह कहना है सेन्टर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक डॉ. रंजना कुमारी का।

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