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सर्दियों के बाद वजीरिस्तान में पूर्ण कार्रवाई: पाक

सर्दियों के बाद वजीरिस्तान में पूर्ण कार्रवाई: पाक

तालिबान आतंकवादियों का गढ़ माने जाने वाले पाकिस्तान के दक्षिणी वजीरिस्तान इलाके में पाकिस्तानी सेना जमीनी कार्रवाई सर्दियों के महीने के बाद ही शुरू हो पाएगी।

पाकिस्तानी सेना के एक वरिष्ठ कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अहमद ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि सेना आतंकवादियों के खिलाफ पूर्ण स्तर की आक्रामक कार्रवाई शुरू करने से पहले उसके लिए ठीक ठीक परिस्थितियां बना रही है। इस तैयारी के तहत सेना ने दक्षिणी वजीरिस्तान में प्रवेश करने और बाहर जाने के सभी रास्तों की कड़ी नाकाबंदी कर दी है। आतंकवादियों के छिपने के ठिकानों पर लड़ाकू विमानों द्वारा बम गिराए जा रहे हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल अहमद ने कहा कि यह सैन्य कार्रवाई के होने में अभी कई महीने लगेंगे। यह संभवतः आने वाले जाड़े के महीने के बाद ही होगी। उन्होंने कहा कि कार्रवाई कब होगी इस बात का फैसला सैन्य कमांडर करेंगे। उन्होंने बताया कि सेना इस समय दक्षिणी वजीरिस्तान में आतंकवादियों को हो रही आपूर्ति को रोकने पर अपना ध्यान दे रही है।

इससे पहले कई अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान द्वारा जमीनी स्तर पर कार्रवाई को टालने पर चिंता जताई थी। अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान सेना पूरे क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित कर ले तथा तालिबान आतंकवादियों को पड़ोसी देश अफगानिस्तान में घुसने से रोके।

लेफ्टिनेंट जनरल अहमद ने कहा कि सेना जमीनी स्तर पर कार्रवाई करने से पहले आतंकवादियों पर लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और तोपखाने की मदद से हमले कर रही है। उन्होंने कहा कि एक बार जब सेना को लगेगा कि परिस्थितियां ठीक हैं और आतंकवादियों के आधारभूत ढांचे और उनकी लड़ने की क्षमता को कमजोर किया जा चुका है तब वह जमीनी स्तर पर अभियान शुरू किया जाएगा। यह संभवतः ठंड या उसके बाद के महीने में हो सकता है।

उन्होंने बताया कि सेना ठीक प्रकार के साजो सामान की कमी का सामना कर रही है जिससे बड़े स्तर पर जमीनी कार्रवाई शुरू करने में बाधा आ रही है। लेफ्टिनेंट जनरल अहमद ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए विशेष अमेरिकी दूत रिचर्ड हॉलब्रूक से इन साजो सामान की कमी की समस्या बताई। उन्होंने हॉलबू्रक से कोबरा लड़ाकू हेलीकॉप्टर देने की मांग की।

उन्होंने बताया कि हेलीकॉप्टरों का स्वात घाटी में चल रही आक्रामक कार्रवाई के दौरान इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन दक्षिणी वजीरिस्तान भेजने से पहले उनका उचित रखरखाव करना होगा। एक अमेरिकी अधिकारी ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि रक्षा मंत्रालय पेंटागन पाकिस्तानी सेना के आतंकवाद निरोधी जरूरतों से पूरी तरह से वाकिफ है। उन्होंने कहा ति हम उनकी कमजोरियां जानते हैं। हम उनकों साजो सामान उपलब्ध कराने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल अहमद ने कहा कि सेना के साजो सामान की जरूरते पूरी होने के बाद यह और प्रभावशाली हो जाएगी। उन्होंने हॉलब्रूक को बताया कि आतंकवादी संगठन तहरीके तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सरगना बैतुल्ला मसूद के मारे जाने का उसके संगठन के लोगों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा है। हालांकि तालिबान अभी भी महत्वपूर्ण शक्ति है जो कभी भी पलटवार कर सकता है।

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