DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कसरत से ही नहीं हो सकते पतले

मोटापे से निजात पाने के लिए जिम जाने, और रोज दौड़ लगाने वाले पहले इस केस पर गौर करें। ये मामला है जयपुर के सीनियर कंपनी एग्जीक्यूटिव शशिकांत (32) का, जो हर हफ्ते मंगलवार को जिम में लगी क्लाइंबर मशीन पर हाथों और पैरों की एक्सरसाइज, और इसके तुरंत बाद आधे घंटे के लिए स्टेयरमिल पर पसीना बहाते हैं। बुधवार के दिन वे एक घंटा अपने पर्सनल ट्रेनर के नाम कर देते हैं, जो अच्छी खासी फीस लेकर एक्स्ट्रा फैब काटने के लिए उनसे इस हद तक कसरत करवाता है कि कई बार चक्कर आने लगता है। शशिकांत का अगला दिन, यानी गुरुवार अपने आप को फोम के खूंटे पर फेंक-फेंक कर फिट रखने की कोशिश का दिन होता है और हर शुक्रवार को बारी आती है आठ किलोमीटर दौड़ लगाने की, यानी पूरा हफ्ता कसरत, कसरत और सिर्फ कसरत के हवाले।

कसरत के दीवाने शशिकांत पिछले चार साल से लगातार ये दिनचर्या अपना रहे हैं। बीच में उन्हें कसरत को करीब आठ महीने का विराम देना पड़ा, जब गर्लफ्रेंड से उनका ब्रेक अप हो गया था, और वे खुश रहने के लिए जमकर मीठा खाने लगे थे। इसी दौरान छरहरे शशिकांत को मोटापे की समस्या ने आ घेरा। तब से लेकर आज तक, तमाम तरह की कसरतें और जिम में समय और धन खर्च करने के बावजूद, उनका वजन कम ही नहीं हो रहा है। तोंद का अच्छा-खासा घेरा उन्हें फैशनेबल गारमेंट पहनने का शौक पूरा करने से रोक रहा है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि इतना शारीरिक व्यायाम करने के बावजूद मोटापा इतना जिद्दी क्यों बना हुआ है?

ज्यादा कसरत, ज्यादा खाना, यानी ज्यादा वजन
हैल्थ क्लब, जिम और फिटनैस के करोड़ों रुपए के कारोबार को एक तरफ रख दें, और असल समस्या की तरफ गौर करें, तो पता चलेगा कि मोटापे या वजन बढ़ने की बीमारी पर इनका असर कम ही होता जा रहा है। नियमित जिम जाने वालों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ बेडौल होते जा रहे लोगों की संख्या भी बढ़ती ही जा रही है। हैल्थ एक्सपर्ट इसका विश्लेषण करते हुए कहते हैं कि अगर लोग थोड़ा कम कसरत करें, तो उनका वजन कम हो सकता है। लेकिन नियमित और ज्यादा कसरत करने से भूख ज्यादा लगती है, और ज्यादा खाने से वजन घटने के बजाय और बढ़ने लगता है।

साठ के दशक में डॉक्टर बड़ी उम्र के लोगों को कहा करते थे कि कसरत से नुकसान हो सकता है, लेकिन इसके उलट आजकल डॉक्टर, युवाओं के साथ-साथ बड़ी उम्र के मरीजों को भी ज्यादा कसरत करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि इसका फायदा भी होता है- मसलन शारीरिक कसरत हार्ट जैसी कई बीमारियों के खिलाफ बीमा या बचाव का काम करती है। इससे कैंसर और डायबिटीज से भी बचाव होता है।
लेकिन जहां तक वजन कम करने का सवाल है, इस मोर्चे पर कसरत में बहाया गया पसीना अक्सर बर्बाद ही होता है। गौर करने वाली बात ये है कि कसरत से कैलोरी तो बर्न होती है, लेकिन साथ ही साथ ये भूख बढ़ाने का काम भी करती है, जो वजन कम करने के आपके मंसूबों पर पानी फेर देती है। इसलिए वजन घटाने के लिए कसरत के भरोसे रहना ठीक नहीं।

एनजीओ पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस की पत्रिका ‘पीएलओएस-वन’ में प्रकाशित अध्ययन में भी इस तथ्य की पुष्टि हुई है। इस स्टडी के लिए ऐसी 450 मोटी महिलाओं को शामिल किया गया, जो कोई नियमित कसरत नहीं करती थीं। इनके चार में से तीन ग्रुप से प्रशिक्षक की देखरेख में हफ्ते में क्रमश: 70, 150 और 200 मिनट एक्सरसाइज छह महीने तक करवाई गई, जबकि चौथे ग्रुप को पहले की तरह सामान्य जीवन जीने दिया गया। सभी ग्रुपों को खानपान की आदतें न बदलने की हिदायत दी गई। जब नतीजे आए, तो पता चला कि चारों ग्रुप की महिलाओं का वजन कम हो गया, लेकिन जो महिलाएं ज्यादा कसरत कर रही थीं, उनका वजन चौथे ग्रुप की महिलाओं के मुकाबले कोई खास कम नहीं हुआ। उल्टे कुछ महिलाओं का वजन चार किलोग्राम तक बढ़ गया।

इच्छाशक्ति और वजन
कुछ लोग मानते हैं कि वजन का मसला इच्छाशक्ति से जुड़ा है। उनके मुताबिक अगर आप खूब कसरत करते हैं, लेकिन साथ ही इससे बढ़ने वाली भूख पर कंट्रोल करने की कूवत भी रखते हैं, तो वजन कम होगा ही। चलिए, एक मिनट के लिए इस तर्क को मान लेते हैं। लेकिन सवाल ये है कि कब तक? आखिर कितने लोग हैं, जो सहज मानवीय प्रवृत्ति के खिलाफ जकर लंबे समय तक इस कठोर व्रत का पालन करते रहने में सफल रहेंगे?

‘साइकोलॉजिकल बुलेटिन’ में प्रकाशित एक शोधपत्र में मनोविज्ञानी मार्क मुरावन का कहना था कि आत्म-नियंत्रण हमारी मांसपेशी की तरह है। इसे जितना इस्तेमाल करेंगे, यह उतना ही कमजोर होती जाएगी। जाहिर है, वजन घटाने के लिए रोज लंबी दौड़ लगाने वाला शख्स कब तक सलाद खाकर फलाहारी बना रहेगा? एक दिन ऐसा आएगा कि वह दौड़ पूरी करते ही हलवाई की दुकान पर पहुंचकर तबियत से दूध रबड़ी का हैवी ब्रेकफास्ट खाना शुरू कर देगा।

आपने देखा होगा, आजकल बच्चों के सबसे पसंदीदा मल्टीनेशनल फास्ट फूड सेंटर अपने कैंपस में बच्चों के लिए प्ले-ग्राउंड का भी इंतजम रखते हैं, ताकि बच्चे वहां आकर जमकर उछल कूद करें, थकें, और बार-बार डायनिंग टेबल पर आकर पिज्जा और बर्गर से भूख भगाते रहें। एक्सपर्ट डॉक्टर बताते हैं कि ऐसे सेंटर पर एक बच्चा औसतन पांच मिनट खेलकर 50 कैलोरी बर्न करता है, और फिर 500 से 1000 कैलोरी का नाश्ता करके ही डायनिंग टेबल छोड़ता है। जो लोग कसरत से वजन घटाने की सोच रहे हैं, उनके लिए ये मिसाल वाकई गौर करने लायक है।

कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि वजन का कम होना इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि हम क्या, और कितना खाते हैं, न कि हम कितना पसीना बहाकर कितनी कैलोरी बर्न करते हैं। सेहत सही रखने के लिए वजिर्श जरूर करें, लेकिन जरूरत से ज्यादा कसरत करके उल्टे मोटापे को निमंत्रण देने की गलती हरगिज न करें।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कसरत से ही नहीं हो सकते पतले