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प्रॉपर्टी में निवेश

अगर आप घर खरीदने के इच्छुक हैं या फिर निवेशक तो कोई भी फैसला लेने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। अल्पावधि में कीमतें कम हैं। ऐसे में किए गए निवेश से बाहर निकलना ही बेहतर रहेगा। असेट क्लास के बारे में कोई बुरी खबर सुनते ही हम में से ज्यादातर लोग यही करते हैं। जब बात रियल इस्टेट की हो तो इस तरह की चिंताएं बढ़ जाती हैं, और जब उसमें होम लोन भी शामिल हो तो यह और भी परेशानी का सबब होता है।

होम लोन की ब्याज दर 2004 से लगातार बढ़ रही है। आपका समय बढ़ता जा रहा है और ईएमआई ज्यादा होती जा रही है। जनवरी के बाद रुपए की कीमत भी कम हुई है। इसके परिणामस्वरूप आपको ब्याज ज्यादा अदा करना पड़ रहा है। जबकि वहीं दूसरी तरफ उस संपत्ति की कीमत कम होती जा रही है।

लेकिन सोचने वाली बात है कि क्या महज इस कारण से निवेश से पीछे हटना सही है? नहीं, ऐसा करना सही नहीं होगा, जब तक उस निवेश को जारी रख सकते हैं, रखें। वजह बिल्कुल साधारण है। दीर्घकाल में इक्विटी के बाद सबसे बेहतर रिटर्न रियल इस्टेट से मिलता है। बाद में जब रेजीडेंशियल यूनिट में मांग और पूर्ति का फॉर्मुला काम करेगा, उस दौरान यह आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

कब निकालें पैसा
अपने निवेश को सिर्फ उसी स्थिति में निकालें जब आपको उसे जारी रखने में दिक्कत आ रही हो। लेकिन तीन बड़ी मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार रहिए। पहला जब लोग निचले स्तर को देख रहे हों, उस समय खरीदार ढूंढ़ना, दूसरा, अगर यह उधार है तो पेपर वर्क पूरा कर लें और तीसरा, बेचते समय टैक्स को कम से कम रखने का प्रयास करें।

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