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दुष्कर्मी को दस साल कैद की सजा

5 साल की तमिल बच्ची के साथ बलात्कार करने वाले 30 वर्षीय मुजरिम को अदालत ने दस साल कैद की सजा सुनाई है। बच्ची ने अभियुक्त की पहचान एवं बयान अनुवादक की सहायता से दर्ज कराए थे।

एडिशनल सेशन जज प्रतिभा रानी की अदालत ने इस मामले में मुजरिम भगवान दास को सजा सुनाते हुए कहा कि ‘पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट से साबित होता है कि उसके साथ बड़ी ही निर्दयता के साथ बलात्कार किया गया। यहां तक की बलात्कार के तीन सप्ताह बाद की गई मेडिकल जांच में अपराध की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।’

अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता के परिजनों ने 20 मार्च 2008 को आई पी एस्टेट थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। अभियुक्त की गिरफ्तारी तीन सप्ताह बाद एक अन्य बलात्कार के मामले में की गई थी। मामले की छानबीन के दौरान अभियुक्त ने पीड़िता के साथ बलात्कार का खुलासा किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के आदेश पर एक तमिल अनुवादक के राज को पीड़िता के बयान दर्ज कराने के लिए नियुक्त किया गया था।

अभियुक्त ने इस मामले में शिनाख्त परेड कराने से इंकार कर दिया था। यहीं अभियुक्त के खिलाफ गया। अभियोजन ने मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में 13 गवाह पेश किए तथा अभियुक्त पर अभियोग साबित करने में सफलता पाई।

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