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लगातार गिरता जा रहा बारिश का ग्राफ

बारिश का ग्राफ कम होने से आम जनजीवन पर बुरा असर पड़ रहा है। जिस जुलाई महीने में सबसे ज्यादा बारिश होनी चाहिए। पिछले चार सालों से उसी महीने में बारिश का आंकड़ा लगातार घटता जा रहा है। यह साल तो बारिश के लिहाज से बहुत बुरा गुजरा है। इसका सबसे बुरा असर खेती-बाड़ी पर पड़ रहा है।

बारिश के चार सालों के आंकड़ों पर गौर करे तो भयावह स्थिति का पता चल जएगा। सामान्य तौर पर मानसून के तीन महीने जुलाई, अगस्त और सितंबर माने जाते हैं। जिनमें अच्छी बारिश होनी चाहिए। इनमें भी जुलाई का महीना बारिश के लिहाज से मुफीद माना जता है। सामान्य रूप से जुलाई में 201.30 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए। लेकिन पिछले चार सालों से इस महीने में बारिश का ग्राफ लगातार कम हो रहा है।

अपर जिला कृषि अधिकारी जयभगवान शर्मा ने बताया कि केवल वर्ष 2006 में जुलाई महीने में 242.74 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसके बाद से ही वर्ष 2007 में 108.89 मिलीमीटर, वर्ष 2008 में 146.86 मिलीमीटर और इस साल तो महज 97.08 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई। अगस्त का महीना भी बारिश के लिहाज से अच्छा नहीं रहा है। सामान्य रूप से इस महीने में 190.40 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। पर इस महीने में बारिश लगातार कम हो रही है। उन्होंने बताया कि अब तक अगस्त महीने में केवल 36.37 मिलीमीटर पानी ही बरस पाया। कम बारिश होने से आम जनजीवन तो अस्त-व्यस्त हो ही रहा है। इसने खेती-बाड़ी को भी तबाह कर दिया है।

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