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बिजली की भारी किल्लत ने उड़ाई नींद

बिजली की भारी किल्लत ने सोनीपत वासियों की समस्याएं बढ़ा दी हैं। शहरी क्षेत्र में रोजाना13 से 15 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 8 से 9 घंटे रोजाना बिजली के करंट लग रहे हैं। उद्योगों को भी निर्धारित बिजली नहीं मिल पा रही है, जिससे उद्योगों की हालत भी पतली होने लगी है। हालांकि सोनीपत के बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता ओके शर्मा पर्याप्त बिजली सप्लाई देने की बात कहते हैं, लेकिन स्थिति विपरीत ही दिखाई देती है।

प्रदेश की भांति सोनीपत भी बिजली संकट से अछूता नहीं है। पिछले लंबे समय से जिलावासी बिजली के संकट से जूझ रहे हैं। गांव हो या शहर या फिर उद्योग हर जगह बिजली की भारी कमी व्याप्त है। कई बार तो भिन्न क्षेत्रवासी बिजली संकट को दूर करने की मांग को लेकर जिला उपायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन भी कर चुके हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में दो पूल में बिजली की सप्लाई दी जा रही है। गांवों में पहले पूल में 7 बजे से 15 बजे तक, 19 से 22 तक तथा 23 से 7 बजे तक और दूसरे पूल में 15 से 3 बजे तक तथा 19 से 22 बजे तक बिजली की सप्लाई दी जा रही है। पहले पूल में थ्री-फेस के लिए बिजली दी जाती है, जिससे किसानों के ट्यूबवैल चल सकते हैं जबकि दूसरे पूल में टू-फेस बिजली सप्लाई होती है, जिसमें ट्यूबवैल नहीं चलाये जा सकते।

बिजली विभाग शहरी क्षेत्र में 24 घंटे बिजली देने का दावा करता है और उद्योगों के लिए प्रतिदिन 8 घंटे बिजली देने की बात करता है। लेकिन स्थिति इसके विपरीत ही है। राठधना निवासी राजीव बताते हैं कि गांवों में रोजाना 13 से 15 घंटे तक बिजली के कट लगते हैं। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बिजली के अभाव में किसान फसलों की सिंचाई भी नहीं कर पा रहे हैं। नियमित रूप से पर्याप्त बिजली न मिल पाने से ट्यूबवैल ठप्प हो गये हैं। इस पर बरसात ने भी मुंह मोड़ रखा है, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं।

अगर स्थिति यही रही तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। शहरी क्षेत्रों के लोग भी बिजली के लिए तरस रहे हैं। जीवन नगर निवासी कपिल का कहना है कि शहरों में भी बिजली की गांवों जैसी हालत हो गई है। उन्होंने कहा कि 24 घंटे में कई बार बिजली के लंबे-छोटे कट लगते हैं। जिससे पेयजल का संकट भी गहरा गया है। बिजली के अभाव में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि लोगों के इनवर्टर भी फेल होने लगे हैं।

कुछ ऐसा ही हाल उद्योगों का भी है। एचएसआईडीसी के उद्योगपति जयपाल आंतिल बताते हैं कि कहने को तो उद्योगों को रोजाना 8 घंटे बिजली दी जा रही है, किंतु वास्तविकता इसके विपरीत है। आंतिल ने कहा कि उद्योगों को मुश्किल से 4 से 5 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों को अपने उद्योग चलाने के लिए जनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन्हें भारी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि बिजली किल्लत ने उद्योगपतियों की कमर तोड़ कर रख दी है। उधर, अधीक्षण अभियंता शर्मा बिजली की पर्याप्त आपूर्ति की बात कहते हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण, शहरी व औद्योगिक क्षेत्रों में निर्धारित शेडयूल के अनुसार बिजली दी जा रही है।

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