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न्यायालय के प्रतिबंध के कारण मुस्लिम समाज में गुस्सा

जैन पर्यूषण पर्व के दौरान नौ दिनों तक कसाईघरों में जानवरों के कटने पर रोक तथा मीट और मुर्गे की दुकानों को बंद करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू किये जाने से कानपुर के मुस्लिम समाज में रोष है और वह इसका विरोध कर रहे हैं।
   

उच्चतम न्यायालय का आदेश लागू होने के बावजूद शहर में मीट और मुर्गे की दुकानें चोरी छिपे चल रही हैं। मीट की कीमतों में तीस से चालीस रूपये की बढ़ोत्तरी और मुर्गे की कीमतों में भी इतनी ही बढ़ोत्तरी देखी जा रही है ।
   

कानपुर शहर से समाजवादी पार्टी के विधायक इरफान सोलंकी का कहना है कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय के आदेश को मानते हुये और जैन धर्म के लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुये पर्यूषण पर्व के दौरान नौ दिन मीट और मुर्गे काटने पर प्रतिबंध लगाया है। लेकिन दो दिन बाद सरकार क्या करेगी क्योंकि दो दिन बाद रमजान का पवित्र माह शुरू हो रहा है।
   

उन्होंने सवाल किया कि सरकार मुस्लिम भावनाओं को ध्यान में रखते हुये रमजान के दौरान शराब एवं अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक क्यों नही लगा देती।
   

जिलाधिकारी (डीएम) अनिल सागर ने मंगलवार को प्रेस ट्रस्ट को बताया कि उच्चतम न्यायालय ने जैन धर्म के लोगों के पर्यूषण पर्व के दौरान 16 अगस्त से 24 अगस्त तक सभी पशु वधशालाओं में जानवरों को काटने पर रोक लगा दी थी तथा मीट और मुर्गे की दुकानों को बंद करने का आदेश दिया था।

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