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आसमां और भी हैं

स्पेस साइंस और ऑपरेशन मैनेजमेंट करियर के दो ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें रोजगार के अकूत अवसर मौजूद होने के साथ काफी कुछ अलग करने का मौका भी है। खासकर स्पेस साइंस ऐसा सेक्टर है जिसको भविष्य में चुनौतीपूर्ण और बेहिसाब तरक्की के अवसरों वाले रोजगार क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है। इनके बारे में जानकारी दे रहे हैं अनुराग मिश्र

भारत की अंतरिक्ष गतिविधियां दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं। चांद के रहस्यों को खोजने के लिए भारत ने चंद्रयान-प्रथम लांच किया था, तो वहीं आने वाले समय में चंद्रयान-2 लांच करने की योजना है। भारत की 2015 तक चांद पर आदमी को भेजने की योजना है। साथ ही इसके अलावा सेटेलाइट की दुनिया में भारत की बादशाहत को तो पूरे विश्व ने मान ही लिया है। आने वाले समय में इतनी संभावनाओं के बीच स्पेस सेक्टर में नौकरी के अवसरों की कई संभावनाएं बनेंगी।

स्पेस साइंस
यह विज्ञान की ऐसी शाखा है जिसमें अंतरिक्ष से जुड़े सारे पहलुओं का अध्ययन किया जाता है। इस विषय की खासियत ये है कि इसके अंतर्गत विभिन्न विषयों मसलन भौतिकी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, मैटीरियल साइंस, रसायन विज्ञान, बायोलॉजी और कंप्यूटर सांइस सरीखे विषयों के सिंद्धातों और एप्लीकेशंस का इस्तेमाल होता है। वृहद तौर पर स्पेस साइंस से चार क्षेत्रों को जोड़कर देखा जा सकता है, पहला एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स, पैरामैट्री एटमॉस्फीयर और एरोनॉमी, अर्थ साइंस और सोलर सिस्टम स्टडीज। एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स सोलर से जुड़े सिद्धांतों की जानकारी देता है, मसलन सोलर फ्लेयर, चुंबकीय क्षेत्र से उनका संबंध आदि।

विशेषज्ञता 
इसके माध्यम से आप मुख्यत: एस्ट्रोफिजिक्स, स्टेलर साइंस, कॉस्मोलॉजी, एस्ट्रोनॉटिक्स, एस्ट्रोफिजिक्स में विषेशज्ञता हासिल कर सकते हैं। एस्ट्रोनॉमी में जहां आप तारों, नक्षत्रों के बारे में गहन जानकारी प्राप्त करते हैं, वहीं एस्ट्रोफिजिक्स में आप उनके भौतिक गुणों का अध्ययन करते हैं। हालांकि वर्तमान में इस क्षेत्रमें काम कर रहे वैज्ञानिकों और तकनीकी विषेशज्ञों में इंजीनियरों की संख्या ज्यादा है, लेकिन इसके साथ ही ऐसे छात्रों की संख्या भी कम नहीं, जो इंजीनियरिंग से इतर बैकग्राउंड मसलन डाटा, डिजाइन और रिमोट सेंसिंग जैसे क्षेत्रों से आते हैं। बतौर स्पेस इंजीनियर आपको मैट्रोलॉजिकल, डाटा एनालिसिस के बारे में जानकारी दी जाती है।

आंकड़े की जुबानी 
आंकड़ों की मानें तो अंतरिक्ष अनुसंधान पर होने वाले खर्च के आधार पर विश्व में भारत का तीसरा स्थान है। स्पेस सेक्टर में लगातार हो रहे प्रयोगों की वजह से यह सेक्टर लाखों युवाओं के लिए नौकरी का मुख्य क्षेत्र बनने वाला है। जानकार मानते हैं कि यह ऐसा क्षेत्र होगा, जिसमें एक डॉलर निवेश करने पर दो डॉलर मिलेंगे।

उभरता सेक्टर
आने वाले समय में इस सेक्टर को संभावनाओं का भंडार माने जाने के कई कारण हैं। भारत को चीन और कनाडा के माइक्रोसेटेलाइट विकसित करने के बाद स्पेस वार की बढ़ती संभावनाओं से निपटने के लिए बेहतर तकनीक ईजाद करनी होगी। भविष्य में यही स्पेस टेक्नोलॉजी सुरक्षा की गारंटी बनेगी। भारत ने इसके विभिन्न एप्लीकेशन मसलन टेलीकम्युनिकेशन, मैट्रोलाजिकल सर्विस, वाटर रिसोर्स, मिनरल और इनवॉयरनमेंटल मॉनिटरिंग, टेलीविजन ब्राडकॉस्ट आदि में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

योग्यता
स्पेस साइंस में अपना करियर बनाने के लिए आपके पास बारहवीं और स्नातक स्तर पर गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान जैसे विषय होने अनिवार्य है। कई विश्वविद्यालय स्पेस साइंस में ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, पोस्ट डॉक्टरल डिग्री करवाते हैं और कई संस्थानों में तो स्पेस साइंस लेकर आप शोध भी कर सकते हैं। इसरो अपने यहां एमएससी, बीएससी, एमई और पीएचडी योग्यताधारी युवक युवतियों को अवसर देता है। इसके अलावा, इसरो में बीएससी और डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों को भी प्रवेश मिलता है। वहीं स्पेस रिसर्च में डिग्री लेकर आप इसमें सीधे करियर बना सकते हैं।

कहां हैं अवसर 
इस क्षेत्र में अवसरों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इस कोर्स के बाद इसरो जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में जहां आपको बतौर गणितज्ञ, आईटी प्रोफेशनल, बायोलॉजिस्ट के तौर पर नियुक्ति मिल सकती है, वहीं इसके अलावा एचएएल हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और एनएएल, डीआरडीओ जैसी जगहों पर काम करने का मौका मिल सकता है। साथ ही स्पेस साइंस और टेक्नोलॉजी से जुड़े संस्थानों में बतौर डाटा प्रोफेशनल, मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में जॉब मिल सकती है।

स्पेस सेंटर और यूनिट   
- विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, तिरुअनंतपुरम
- इसरो सेटेलाइट सेंटर, बेंगलुरु 
- स्पेस एप्लीकेशन सेटर, अहमदाबाद 
- एसएचएआर सेंटर, श्रीहरिकोटा, आंध्रप्रदेश
- इसरो टेलीमेट्री, ट्रेकिंग ऐंड कॉमन नेटवर्क, बेंगलुरु 
- नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी, हैदराबाद
- डेवलपमेंट एंड एजूकेशन कम्युनिकेशन यूनिट, अहमदाबाद

संस्थान  
इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ स्पेस साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी, तिरुअनंतपुरम
कोर्स : बैचलर डिगरी इन स्पेस टेक्नोलॉजी, फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी, अहमदाबाद
कोर्स : पी एच डी, एटमॉसफरिक ऐंड स्पेस साइंस, इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ जियोमैग्नेटिज्म, मुंबई
कोर्स : पी एच डी, एटमॉसफरिक ऐंड स्पेस साइंस, गुजरात यूनिवर्सिटी
कोर्स : एडवांस्ड पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन स्पेस साइंस एंड एप्लीकेशन, पुणे युनिवर्सिटी
कोर्स : एम एस सी इन स्पेस एंड एटमॉस्फिरिक साइंस

ऑपरेशन मैनेजमेंट भी तो है!
आज के दौर में हर क्षेत्र में ऐसे लोगों की आवश्यकता काफी बढ गई है, जो मल्टीस्किल्ड हों। ऑपरेशन मैनेजमेंट, प्रबंधन का ऐसा ही क्षेत्र है, जो करियर की कई नई राहें खोलता है।

ऑपरेशन मैनेजमेंट
ऑपरेशन मैनेजमेंट उत्पादों के डिजाइन और मैनेजमेंट, प्रोसेस, सर्विस और सप्लाई चेन का काम देखता है। यह कंपनी के महत्वपूर्ण फैसले कवर करता है। यह उत्पादों के डिजाइन के बारे में पूर्वानुमान, क्षमताओं की योजना, चयन प्रक्रिया, तकनीकी चुनाव, सुविधाओं और सप्लाई चेन मनेजमेंट, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, मेंटेनेंस मैनेजमेंट, क्वालिटी मैनेजमेंट का काम देखता है। 

कोर्स का यूएसपी
ऑपरेशन मैनेजमेंट कोर्स करने के बाद किसी फैक्टरी या कंपनी के कामकाज को बेहतर तरीके से करने में सक्षम होता है। इस कोर्स में छात्र टेक्नोलॉजी और प्रबंधन दोनों के बारे में जानकारी करता है जो काम के दौरान उसे दूसरों के मुकाबले ज्यादा सक्षम बनाती है। एक तरह से कहा जाए तो ऑपरेशन मैनेजमेंट का कोर्स आपको सिखाता है कि किसी कंपनी के टेक्निकल और फिजिकल कामों को एक साथ कैसे मैनेज किया जाए। इस कोर्स में आपको डिजाइन इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट इनफॉरमेशन सिस्टम, अकाउंटिंग के बारे में जानकारी दी जाती है। इस कोर्स में उपलब्ध स्रोतों का बेहतर तरीके, बिजनेस एप्लीकेशन में तकनीक और बिजनेस प्रक्रियाओं का बेहतर तरीके से इस्तेमाल और प्रबंधन करना सिखाया जाता है।   

कम नहीं मौके
ऑपरेशन मैनेजमेंट में स्नातक विभिन्न क्षेत्रों में करियर विकल्प तलाश सकता है। निर्माण, सलाहकार फर्म, वित्तीय संस्थान, हॉस्पिटैलिटी, इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी, इंश्योरेंस, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल, ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक। प्रत्येक मैनुफैक्चरिंग कंपनी ऑपरेशन की देखरेख के लिए ऑपरेशन मैनेजर रखती है।

ऊंचे स्तर पर ऑपरेशन मैनेजर को प्रोडक्शन मैनेजर, प्लांट और साइट मैनेजर आदि का पद मिलता है। ये किसी कंपनी की मैनुफैक्चरिंग ऑपरेशन रणनीति को तैयार करते हैं। इसके अलावा यह किसी प्लांट में लंबी अवधि के निवेश, उपकरणों के बारे में भी फैसला करते हैं। शुरुआती स्तर पर एमबीए बतौर परचेज मैनेजर ज्वाइन करते हैं। वह सप्लायर चुनना, कीमतों का मोल-भाव करना और गुणवत्ता बरकरार रखने सरीखे काम करते हैं।

कहां हैं नौकरियां
कस्टम सर्विस सपोर्ट, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, फोरकास्टिंग, इन्वेंटरी प्लानिंग और कंट्रोल, मैटीरियल मैनेजमेंट, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, क्वालिटी मैनेजमेंट, ट्रैफिक मैनेजमेंट, वाटरहाउस मैनेजमेंट एंड डिस्ट्रिब्यूशन। वर्तमान में ऑपरेशन मैनेजमेंट से जुडे लोगों की सप्लाई चेन मैनेजमेंट और ईआरपी इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग में मांग ज्यादा है।

प्रवेश प्रक्रिया और योग्यता
आईआईएम में दाखिले के लिए कैट की प्रवेश परीक्षा देनी होती है। उसके बाद जीडी और इंटरव्यू होता है। इसके अलावा कई कॉलेज अपनी प्रवेश परीक्षा भी आयोजित करते हैं, जिसके आधार पर एडमिशन मिलता है। अकसर लोगों में धारणा होती है कि इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के छात्रों के लिए यह कोर्स बेहतर होते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है, इस कोर्स को कोई भी स्नातक एमसीए, बीटेक, बीबीए या बीए आदि उत्तीर्ण छात्र कर सकता है।

संस्थान
-ऑपरेशनल रिसर्च इंस्टीटयूट ऑफ इंडिया
-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी
-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, कोलकाता और लखनऊ
-सिंबोयसिस इंस्टीटयूट ऑफ ऑपरेशन मैनेजमेंट, पुणो
-एडमिनिस्ट्रेटिव स्टॉफ कॉलेज ऑफ इंडिया, हैदराबाद द्वारा संचालित मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम इन ऑपरेशन

मैनेजमेंट
-आईआईएम, अहमदाबाद - एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट प्रोगाम इन मैनेजमेंट
-नारसी मुंजे इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई

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