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खांसी से बचें

मौसम में बदलाव के साथ-साथ लोगों का खांसी के प्रभाव में आना आम बात है। छाती में जब वायु प्रवेश करती है तो कभी-कभी श्वास नली बंद हो जाती है। बैचेनी होने पर अवरोध खुल जाता है और आवाज के साथ हवा बाहर आती है। इसे ही खांसी कहते हैं। श्वासनली, स्वरतंत्र या फेफड़ों में गड़बड़ी होने से महीनों खांसी रहना चिंताजनक है। इसके अतिरिक्त रोगी को बलगम आने और सांस फूलने की शिकायत भी हो सकती है। खांसी के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।

इलाज 
-शीतोफलादि चूर्ण को शहद में मिलाकर चाटने से बहुत आराम मिलता है। बच्चों के लिए चूर्ण की तीन और बड़ों को छह ग्राम मात्रा दी जानी चाहिए। शहद एक चम्मच हो। इसका प्रयोग दिन में तीन बार करना चाहिए।

-आधा चम्मच अदरक के रस में आधा चम्मच शहद और चुटकी भर काला नमक मिलाकर खाने से भी आराम मिलता है। इस मिश्रण का प्रयोग दिन में तीन बार सुबह, दोपहर और रात को खाना खाने के लगभग आधे घंटे बाद करना चाहिए। लगभग दस दिनों तक लगातार लें।

-यदि गर्भवती महिलाओं को खांसी की शिकायत हो तो आधा कप दूध में लगभग तीन ग्राम बड़ी इलायची का चूर्ण मिलाकर उसे आधा कप पानी में तब तक उबालें जब तक पानी आधा न हो जाए। इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम देने से लाभ होगा।

-गर्म पानी में नमक डालकर गरारे करने से भी संक्रमण में आराम मिलता है।

-खांसते समय मुंह पर रुमाल रखना चाहिए। बलगम इधर-उधर न थूकें। बच्चों तथा बुजुर्गो को नमी से बचाना चाहिए।

-पौष्टिक व सुपाच्य भोजन लें। चावल, खट्टा दही, राजमा, उड़द दाल व बासी भोजन न लें।

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