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बैंक का शुल्क-2

कल हमने बैंक के अतिरिक्त शुल्क के बारे में बात की थी, जो अनजाने में सामने आ जाते हैं। आज उसी संदर्भ में कुछ और जानकारी।

बिल का भुगतान टालें नहीं
अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान टालते रहते हैं तो यह महंगा पड़ सकता है क्योंकि बैंक बकाया बिल में ब्याज के ऊपर ब्याज लगाते हैं। बैंकों के क्रेडिट कार्ड के नियमों के पेंच में आप ऐसे फंस सकते हैं जिससे कई बार तो आपको अपने बकाए बिल का दोगुना भुगतान तक करना पड़ जाता है। इसके अलावा बैलेंस सर्टिफिकेट, निश्चित अनुपात में पैसा न रखने और चेक बाउंस हो जाने, ड्राफ्ट निरस्त करने, पुराने रिकॉर्ड जानने, ज्वांइट एकाउंट में डेबिट कार्ड होने की स्थिति में भी बैंक अतिरिक्त शुल्क लगाते हैं।

ध्यान रखें
- कॉल सेंटर या प्राइवेट एजेंटों द्वारा बताई गई स्कीम के बहकावे में न आएं। पूरी तफ्तीश कर लें कि इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क तो नहीं लिया जा रहा।

- अगर आपने कोई लोन लिया है, तो समय-समय पर उसके बारे में जानकारी लेते रहें। क्योंकि लोन के लिहाज से शर्ते अलग होती हैं और उनकी सही जानकारी न होने पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ आप पर पड़ सकता है। इसके अलावा, बंक फोरक्लोजर कॉस्ट के बहाने आप पर अतिरिक्त शुल्क थोप सकते हैं।

- संभव हो तो क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान कैश के बजाए अन्य माध्यमों से ही करें।

- जब आवश्यक हो, तभी फोन बैंकिंग का इस्तेमाल करें।

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