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असरदार कम्युनिकेशन

आजकल करियर में कामयाबी के लिए सबसे जरूरी चीज है कम्युनिकेशन का प्रभावशाली होना। इसके लिए सबसे पहले ये जानना जरूरी होता है कि संदेश में कौन से तत्व हों, जिनसे यह सामने वाले तक बिल्कुल सही-सही और अपेक्षित प्रभाव के साथ पहुंच जाए। यहां हम असरदार कम्युनिकेशन का ‘फोर-सी’ फॉमरूला पेश कर रहे हैं-

- कम्प्रीहैंसिव : कम्युनिकेशन छोटा और सुसंगत होना चाहिए। संदेश इतना सरल हो कि  समझने में कतई जोर न आए। लंबा-चौड़ा और शब्द जाल बुनकर दिया गया संदेश ज्यादातर अपना अर्थ खो देता है। संदेश ऐसा होना चाहिए, जो टारगेट ऑडियंस की समझ से परे न हो।

-क्रेडिबल : अगर आप चाहते हैं कि आपका संदेश अपना प्रभाव छोड़े, तो ये सुनिश्चित कीजिए कि यह विश्वसनीय हो। अगर आप ठीक से रिसर्च करके पूरे तथ्यों के साथ इस ढंग से संदेश देंगे कि हर कोई उस पर विश्वास करे, तो यह असरदार होकर रहेगा।  

- कनेक्ट : कम्युनिकेशन का तीसरा ‘सी’ है कनेक्ट, यानी जुड़ाव। अगर किसी संदेश में विश्वसनीयता न भी हो, तब भी चलेगा- बशर्ते कि यह प्राप्त करने वाले से कनेक्ट हो रहा हो। इसी प्रकार अगर कोई संदेश उस वर्ग से कनेक्ट ही न होता हो, जिसके लिए दिया गया है, तो इसका असर होने का सवाल ही नहीं है। यहां कनेक्ट से मतलब है, सामने वाला उस पर तत्काल अपनी प्रतिक्रिया दे, या उसके चेहरे पर कोई भाव आ जाए।

- कंटेजियस : जब आप अपने संदेश में ऊपर बताए गए तीन ‘सी’ को समाहित कर लेंगे, तो टारगेट ऑडियंस के अलावा अन्य लोगों तक भी इसका प्रभाव पहुंचाने की ख्वाहिश रखेंगे। और ऐसा केवल तभी हो सकता है, जब आपका संदेश इतना रोचक हो कि लोग इसे सबके साथ बांटे बगैर न रह पाएं।

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