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27 फरवरी, 2020|11:34|IST

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गिर सकती है एडॉप्ट और गेस्ट लेक्चर्रस पर गाज !

बिना नेट किए गवर्नमेंट कॉलेजों में लगे एडॉप्ट और गेस्ट लेक्चरर पर गाज गिर सकती है। लेक्चररशिप के लिए यूजीसी ने नेट अनिवार्य कर दिया है। जिन्होंने नेट नहीं किया है। उन्हें इसकी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। इसके बिना अब कॉलेजों में कोई गुंजाइश संभव नहीं। ऐसा हुआ तो जिले के गवर्नमेंट कॉलेजों में गेस्ट लेक्चरर के रूप में लगे कईयों की छुट्टी तय है।

वर्तमान में करीब चालीस गेस्ट लेक्चरर लगे हुए हैं। अकेले नेहरू कॉलेज में पंद्रह गेस्ट लेक्चर्रस हैं। सबसे अधिक परेशानी का सामना एडॉप्ट लेक्चर्रस को करना होगा। इन्हें हर हाल में नेट क्वालीफाई करना जरुरी कर दिया गया है। इनको दो साल की मोहलत दी गई है। चार बार ये नेट की परीक्षा में शामिल होंगे। क्वालीफाई नहीं करने की सूरत में इन्हें लेक्चररशिप से हटा दिया जाएगा। प्रदेश में एडॉप्ट लेक्चर्रस की संख्या सोलह है।

गवर्नमेंट कॉलेज में लगे ज्यादातर एडॉप्ट और गेस्ट लेक्चर्रस मास्टर और एम फिल हैं। यूजीसी ने बेहतर शिक्षा के लिए लेक्चर्रस को पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य किया है। इसका मकसद बेहतर लेक्चर्रस तैयार करना है। जिससे शिक्षा का स्तर ऊंचा उठ सके। नेट के अलावा जो लेक्चर्रस राज्यस्तरीय पात्रता परीक्षा(स्लेट) उत्तीर्ण होंगे। उनकी पौ बारह है। नेहरू कॉलेज के प्रोफेसर एस पी फोगाट ने बताया कि यह एक बेहतर कदम होगा। नेट या स्लेट उत्तीर्ण आने से शिक्षा में गुणात्मक सुधार आएगा। ज्यादातर गवर्नमेंट कॉलेजों में गेस्ट लेक्चरर से काम चलाया जा रहा है।

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