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आतंकी हमले का कोई विशिष्ट खतरा नहीं: चिदंबरम

आतंकी हमले का कोई विशिष्ट खतरा नहीं:  चिदंबरम

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा पाकिस्तान के आतंकी समूहों की भारत पर नए सिरे से हमले करने की साजिश रचने की विश्वसनीय सूचना होने के बयान के बाद गृह मंत्री पी चिदंबरम ने सोमवार को कहा कि कुछ आतंकवादी संगठन हैं जो भारत के खिलाफ हमलों की साजिश जरूर कर रहे हैं लेकिन फौरी तौर पर कोई विशिष्ट खतरा नहीं है।

चिदंबरम ने कहा कि लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि कहीं भी फौरी तौर पर किसी हमले का कोई विशिष्ट खतरा है। ऐसे समूह हैं, जो भारत के खिलाफ साजिश कर रहे हैं इसलिए भारत के लिए खतरा बरकरार है। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में हुई चर्चा के बारे में संवाददाताओं को ब्यौरा देते हुए कहा कि लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि कल या परसों में कोई खतरा या हमला होने वाला है।

चिदंबरम प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन भाषण में कही गई इस बात पर सवाल किया गया था कि भारत में हमले करने के लिए आतंकवादी संगठनों की योजना के बारे में विश्वसनीय सूचना है। गृह मंत्री ने कहा कि वह और प्रधानमंत्री दोनों ही कह चुके हैं कि इस सच्चाई के बावजूद कि भारत में पिछला आतंकी हमला पिछले साल नवंबर में हुआ था, खतरा किसी भी तरह से कम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि खतरा बना हुआ है। अब जब भारत के लिए आतंकवादी खतरा है, आपको मानना होगा कि यह खतरा भारत के किसी भी हिस्से में हो सकता है। मैंने अपने शुरुआती बयान में कहा था कि हम निगरानी कम करने की स्थिति में नहीं है और हमें निगरानी कम नहीं करनी है ।

यह कहे जाने पर कि इन बयानों के मद्देनजर भारत को क्या पाकिस्तान के साथ विश्वास और पुष्टि की नीति जारी रखनी चाहिए, चिदंबरम ने कहा कि हां, मेरा मानना है कि यह एक बुद्धिमत्तापूर्ण नीतिगत बयान है जो सतर्कतापूर्वक चर्चा के बाद दिया गया है। हमें पाकिस्तान के साथ रिश्तों में विश्वास और पुष्टि की नीति रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने यही कहा है और यदि आप इसे रंगीन भाषा में चाहते हैं तो मैं कह सकता हूं कि हमें बारूद सूखा रखना (तैयार रहना) चाहिए। चिदंबरम ने कहा कि इसमें से कोई भी बात एक दूसरे की विरोधाभासी नहीं है। प्रधानमंत्री के बयान में व्यापक तौर पर इसी बात पर जोर है कि हमें विश्वास करना चाहिए लेकिन पुष्टि करने के बाद, जो बहुत बुद्धिमत्तापूर्ण नीति है।

गृहमंत्री ने सोमवार के सम्मेलन की चर्चा के बारे में कहा कि वह राज्य सरकारों के नजदीकी सहयोग से काम करने का इरादा रखते हैं और कानून व्यवस्था बनाये रखने में राज्य सरकारों की मुख्य भूमिका को मानते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा राज्यों के अपने दौरे फिर से शुरू करने का विचार है ताकि राज्यों के मुख्यमंत्री और मैं संयुक्त रूप से उस राज्य विशेष के सुरक्षा हालात और उसकी विशिष्ट आवश्यकताओं की समीक्षा कर मौके पर ही फैसले कर सकें। 

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