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बाढ़ बचाव कार्य में घोटाला, सिंचाई विभाग के डेढ़ दर्जन इंजीनियर सस्पेंड

बाढ़ से बचाव के मामले में घपलेबाजी के आरोप में सिंचाई विभाग के डेढ़ दर्जन अभियंताओं को प्रदेश सरकार ने निलम्बित कर दिया है। इन सबके खिलाफ उच्च स्तरीय जाँच भी बैठा दी है।

बाँध में हुए घोटाले की जाँच का यह मामला बलिया जिले के तुर्तीपार-श्रीनगर बाँध का है। प्रदेश सरकार को पता चला कि बलिया में तुर्तीपार-श्रीनगर बाँध में इंजीनियरों ने बडा घोटाला कर डाला है। इससे न केवल बाढ़ की आशंका हमेशा बनी रहेगी बल्कि जन सामान्य के लिए खतरा भी पैदा हो गया है। इस सूचना के आधार पर राज्य सरकार ने पिछले साल तकनीकी जाँच कमेटी को इस बाँध के निर्माण में हुए घोटाले की जाँच सौंप दी।

जाँच में अधिकारियों ने पाया कि अल्पकालीन निविदाओं को अखबारों में प्रकाशित नहीं किया गया। फ्लड फाइटिंग कार्य जो तीन करोड़ रुपए से अधिक के थे, उसकी टेक्निकल स्वीकृति प्राप्त नहीं की गई। संवेदनशील स्थानों पर बोल्डर की आपूर्ति का ब्यौरा रजिस्टर में नहीं चढ़ाया गया। कई जगह बैक डेटिंग भी जाँच में पाई गई।

माप पुस्तिकाओं में खाली पन्ने छोड़े गए और बिना किसी तारीख के हस्ताक्षर कर डाले गए। जाँच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने माना कि वहाँ तैनात अभियंताओं की साँठ-गाँठ से विभाग को करीब तीन करोड़ रुपए की क्षति पहुँची है और जान-माल का खतरा भी पैदा हो गया है।

इस पर प्रमुख सचिव अरुण कुमार सिन्हा ने गंडक के रिटायर हो चुके मुख्य अभियंता वीपी सिंह के खिलाफ अनुशानात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया। शासन ने अधीक्षण अभियंता मुन्ना सिंह, अधिशासी अभियंता पीसी यादव, बीडीएस यादव व पीएल दिनकर, सहायक अभियंता दया शंकर सिंह, विन्ध्याचल प्रसाद, लाल बहादुर सिंह व एसबी सिंह को निलम्बित करने का निर्णय लिया है।

उनसे इस नुकसान की क्षतिपूर्ति भी कराई जाएगी। इस कार्य में लिप्त जिन सात अवर अभियंताओं को भी निलम्बित किया गया है वे हैं आरके सिंह, ओम प्रकाश उपाध्याय, आरबी राम, अनिल कुमार गुप्ता, केशव कांत त्रिपाठी, सीबी सिंह व एबी सिंह।

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  • Web Title:बाढ़ बचाव कार्य में घोटाला