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रघुवर को बनाया बंधक, मांगा इस्तीफा

पलामू और चतरा लोकसभा की सीट जदयू को दिये जाने के विरोध में दोनों क्षेत्रों के नेताओं-कार्यकर्ताओं ने प्रदेश मुख्यालय में सोमवार को दिन भर नारबाजी की। प्रदेश अध्यक्ष रघुवर दास को उनके ही कार्यालय कक्ष में घंटों बंद कर बंधक बना दिया। भाजपाइयों ने मुख्यालय के दोनों मुख्य प्रवेश द्वारों पर ताला जड़ कर अपने विरोध प्रदर्शन किया। राजनाथ सिंह, रांन पटेल, रघुवर दास से लेकर गणेश मिश्र के विरोध में नारबाजी की। चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं करने पर प्रदेश अध्यक्ष से भी इस्तीफे की मांग की। कार्यक्रम का नेतृत्व सत्यानंद भोक्ता, सूर्यमणि सिंह, श्याम नारायण दुबे, बृजमोहन राम, बैजनाथ राम, परशुराम ओझा, रामविलास सिंह, लाल कौशल किशोर नाथ शाहदेव, जवाहर पासवान, राम प्रवेश सिंह, वीरंद्र सिंह, वीपी शुक्ला समेत अन्य नेता कर रहे थे।ड्ढr दिन के 12 बजे पलामू, चतरा, गढ़वा और लातेहार से पहुंचे कार्यकर्ता प्रदेश मुख्यालय के प्रवेश द्वार पर नारबाजी करने लगे। यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। वे दोनों सीट जदयू को देने को संगठन के लिए अहितकर बता रहे थे। कार्यकर्ता-नेताओं का कहना था कि पलामू-चतरा में जदयू का कोई जनाधार नहीं है। इस बार फिर भाजपा के चतरा जिला उपाध्यक्ष रहे अरुण यादव को जदयू ने टिकट देकर इसे साबित किया है। टिकट बेचा गया है। अगर प्रदेश के नेता और अध्यक्ष पलामू और चतरा के कार्यकर्ताओं के साथ हैं, तो वे भी पद से इस्तीफा दें। सिंबल दें या चुनाव लड़ने की इजाजत दें। काफी हंगामे के बाद लगभग तीन बजे उत्तेजित कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे रघुवर के समझाने का भी कोई असर नहीं हुआ। वे देर शाम मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन और नारबाजी करते रहे।ड्ढr रघुवर दास के समझाने का भी नहीं पड़ा असरड्ढr रांची। पलामू और चतरा के उत्तेजित कार्यकर्ताओं को प्रदेश अध्यक्ष रघुवर दास के समझाने का कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रदेश भाजपा शुरू से ही दोनों क्षेत्रों में चुनाव लड़ने की पक्षधर रही है। केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में भी उन्होंने इसे दमदार ढंग से रखा था। राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और एनडीए के संयोजक शरद यादव के समक्ष भी इस बात को रखा। पर सबको जानकारी होनी चाहिए कि देश में गठबंधन की राजनीति चल रही है। इसकी अपनी मजबूरी होती है। पलामू और चतरा बिहार से सटी हुई सीटें हैं। फिर भी हम दबाव बनाये हैं। फ्रेंडली मैच को भी तैयार हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष और शरद यादव से बात कर रहे हैं। हम इस्तीफा देने को तैयार हैं पर यह समाधान नहीं है। भाजपा राष्ट्रीय पार्टी है इसलिए राष्ट्रीय अध्यक्ष की बात मानने की बाध्यता है। हमें बहुत ज्यादा अनुशासन की सीमा को लांघने की जरूरत नहीं है। लेकिन कार्यकर्ता उनकी बात नहीं माने। वे उनके ही समक्ष विरोध में नारबाजी करने लगे।

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