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महज आंकड़ों और गणित का खेल

हाल में वित्त मंत्रालय ने जो टैक्स में प्रस्ताव जारी किए हैं, उनके मुख्य विंदुओं पर अगर गौर करें तो इसमें केवल आंकड़ों और गणित का खेल ही नजर आता है। एक ओर एक लाख साठ हजार के वार्षिक आय को करमुक्त रखा गया है तो दूसरी ओर अन्य सुविधाओं को कर के दायरे में लाया गया है। सभी तरह के निवेश की निकासी पर भी टैक्स की व्यवस्था है। होम लोन के ब्याज पर अब कोई छूट नहीं मिलने वाली है, जो कि कर दाताओं के लिए निराश करने योग्य फैसला है। लेकिन कॉरपोरेट टैक्स में 25 प्रतिशत की की कमी स्वागत योग्य है। साथ ही टैक्स चोरी करने वाली कंपनियों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। जो ऐसा करेंगे, उनके ऊपर डबल टैक्स लगाया जाएगा।

वेदव्रत चौधरी, दिल्ली

गरीबों के साथ खिलवाड़
विगत वर्ष 5 अगस्त 2008 को दिल्ली सरकार ने राजीव आवास रत्न योजना के माध्यम से शहरी गरीब झुग्गी झोपड़ी व दलितों के लिए एक अतिमहत्वाकांक्षी परियोजना का शुभारंभ बड़े उत्साह के साथ किया था तथा उस समय माननीय मुख्यमंत्री महोदया ने आवेदन पत्र में बड़े ही लुभावने अंदाज में कहा था कि वर्ष 2008 के अंत तक दिल्ली की मेहनतकश गरीब जनता के लिए सरकार का लक्ष्य 50 हजार मकान बनाना था। हमने सूचना के अधिकार के माध्यम से आखिर दिल्ली सरकार से पूछ ही लिया कि आखिर राजीव रत्न आवास योजना का हुआ क्या तो जो जवाब हमें मिला वह काफी चौंकाने वाला है। उसमें हमें बता दिया कि उसमें कुल 2,77,518 आवेदन पत्र मिले, परंतु उसमें कितनेएससी/एसटी के थे कितने पुरुष व महिलाओं के कितने आवेदन थे तो जवाब था संकलन कार्य पूर्णता की ओर है। आवेदन कर्ताओं को कितने समय में आवंटन का प्रावधान था? तो उसके उत्तर में स्पष्ट रूप से कहा गया कि समय सीमा निर्धारित करना संभव नहीं है।

ललित भसोढ, सचिव, जुलाहा धानक समाज वेलफेयर सोसाइटी, पहाड़गंज, नई दिल्ली

सच का सामना
वो कहता रहा
मैं सुनता रहा
कुछ इस कदर
मैंने सच का
सामना किया।
वीरेन कल्याणी, शाहदरा, दिल्ली

विकलांग उद्यमी का प्रयास
भारतीय समाज में विकलांग होना आमतौर पर अभिशाप माना जाता है। इस अभिशाप को वरदान में बदलने वाले बहुत कम लोग होते हैं। ऐसे ही एक विकंलाग युवा उद्यमी इरफान (कप्तान सिद्दीकी) ने विकलांगता दिखाकर भीख मांगने के बजाय थोड़ी पूजी निवेश करके अपना फुटपाथी कारोबार शुरू किया। उसने जैसे-तैसे करके 2200 रुपए जुटाये और रोहिणी में फुटपाथ पर गुटका आदि बेचने का धंधा शुरू किया। आज वह प्रतिदिन 500 रुपये की बिक्री करता है। इरफान की कहानी से बहुत से लोग सीख ले सकते हैं।

सुरेन्द्र प्रभात खुर्दिया

अपनों को वक्त कहां
हवाओं आओ
अब तुम भी
धधकती आग से खेलो
कहां है वक्त
चहेतों को
पलट के देख ले मुझको।

शरद जयसवाल, कटनी, मध्य प्रदेश

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