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महिलाओं को बिना मांगे जमानत

सुप्रीम कोर्ट के जज पर चप्पल फेंकने वाली चार महिलाओं को सर्वोच्च अदालत की दूसरी बेंच ने तीन दिन बाद जमातन पर रिहा कर दिया है। लेकिन बेंच ने कहा कि वह इस पर सवाल पर विचार करगी कि क्या अदालत को ऐसे मामलोंे में अदालत अवमाननाकारी को तुरंत और बिना सुनवाई के जेल भेज सकती है? शुक्रवार को मुंबई के बॉस स्कूल आफ म्यूजिक की चार महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरिाित पसायत पर चप्पल फेंक मारी थी जिस पर जज ने तुरंत आदेश जारी कर उन्हें तीन माह के लिए जेल भेज दिया था। हालांकि बाद में इस बेंच के दूसर जज एके गांगुली ने इस ‘तुरंत फैसले’ पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया और देर शाम मामला मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया। मुख्य न्यायाधीश ने आदेश दिया कि महिलाओं को जेल भेजा जाए तथा मामला सोमवार को जस्टिस बीएन अग्रवाल की तीन सदस्यीय बेंच के समक्ष रखा जाए। सोमवार को चारों महिलाओं लीला डेविड (75), एनेट कोटियन, पवित्रा मुरली और सरिता पारिख को भारी पुलिस संरक्षा में जस्टिस बीएन अग्रवाल, जीएस सिंघवी और एचएल दत्तू की पीठ के समक्ष पेश किया गया। उनमें से किसी के भी चहर पर शिकन नहीं थी। पीठ ने स्वत: ही आदेश दिया कि चारों को तुरंत जमानत पर छोड़ दिया जाए। पीठ ने कोर्ट में मौजूद रािस्ट्रार (न्यायिक) से कहा कि वह व्यक्ितगत बांड लेकर उन्हें जमानत पर छोड़ दें। इस आदेश का सालिसिटर जनरल ने विरोध नहीं किया। सुनवाई के दौरान पवित्रा मुरली ने कहा कि कोर्ट ने 75 वर्षीय महिला को भी तीन दिन जेल भेज दिया जबकि उन्होंने शुक्रवार को एक शब्द भी मुंह से नहीं निकाला था। पीठ ने आदेश दिया कि वह अवमानना के आरोपियों से जुड़े सभी केसों की 14 अप्रैल को सुनवाई करगी। शुक्रवार को जस्टिस अरिाित पसायत और जस्टिस एके गांगुली की खंडपीठ के सामने जसे ही उनका मामला सुनवाई पर आया अवमानना की आरोपी चारों महिलाओं ने चिल्लाना शुरू कर दिया। वे कहने लगीं कि उन पर अवमानना का आरोप लगाने वाले जज को ही जेल भेजना चाहिए। इस दौरान चारों में से एक अपनी चप्पल उतारी और जस्टिस पसायत को निशाना बनाकर उनकी ओर उछाल दी।

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  • Web Title: महिलाओं को बिना मांगे जमानत